Sri Ganganagar Crime News: श्रीगंगानगर के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने और विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को झूठे मामलों में फंसाने के प्रयास का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में कोतवाली पुलिस ने पीड़ित अधिकारी की रिपोर्ट पर पति-पत्नी सहित पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Sri Ganganagar Honey Trap Case: श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) सुनील कुमार भाटिया को हनीट्रैप में फंसाने और ब्लैकमेल करने की बड़ी साजिश रची गई। इस मामले में स्थानीय कोतवाली पुलिस ने पीड़ित अधिकारी की रिपोर्ट पर एक दंपती (पति-पत्नी) सहित पांच लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, अग्रसेन नगर के रहने वाले मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार भाटिया ने अपनी शिकायत में पुरानी आबादी (वार्ड नंबर 2) के निवासियों को नामजद किया है। आरोपियों में रीटा शर्मा, उसका पति भंवरलाल शर्मा, पवन कुमार, प्रियंका और कुछ अन्य लोग शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत अधिकारी को फंसाने का जाल बुना था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने अधिकारी पर दबाव बनाने और उन्हें डराने के लिए 100 रुपए के अदालती स्टांप पेपर पर एक पूरी तरह से झूठा शपथ पत्र तैयार किया। इस शपथ पत्र में अधिकारी के ऊपर यौन शोषण जैसे बेहद गंभीर और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए थे।
इसके अलावा शिक्षा अधिकारी का साफ कहना है कि वे इस संबंधित महिला को न तो पहले से जानते हैं और न ही कभी उनका उससे किसी भी प्रकार का कोई संपर्क या बातचीत रही है।
ब्लैकमेलिंग के इस खेल को असली रूप देने के लिए आरोपियों ने कई फर्जी दस्तावेज, नकली लेटरपैड और जाली डाक कागजात भी तैयार किए। इन कागजातों में अपने हिसाब से कांट-छांट की गई और नकली हस्ताक्षर करके उन्हें बिल्कुल असली दिखाने की कोशिश की गई। इन जाली कागजों के जरिए आरोपियों ने पुलिस और प्रशासन को भी गुमराह करने का प्रयास किया।
अधिकारी ने यह भी खुलासा किया कि आरोपियों ने एक राजनीतिक पार्टी के नकली लेटरपैड का गलत इस्तेमाल किया और उसके जरिए विभाग के अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी झूठी शिकायतें भेजीं, ताकि पूरे शिक्षा विभाग की छवि को खराब किया जा सके। जब इस पूरी साजिश के पीछे की वजह तलाशी गई, तो पता चला कि आरोपियों में से कुछ लोग पहले से ही विभाग में दागी रहे हैं।
उनके खिलाफ पहले से ही विभागीय जांच चल रही है, कुछ को सस्पेंड किया जा चुका है और कुछ पर आपराधिक केस भी दर्ज हैं। इसी पुरानी रंजिश और बदले की भावना के कारण उन्होंने अधिकारी को बदनाम करने के लिए हनीट्रैप का यह रास्ता चुना। फिलहाल, कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच एएसआई स्वर्ण सिंह को सौंप दी है।