
Sri Ganganagar Child Marriage: घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। बारात पहुंच चुकी थी, मंगल गीत गाए जा रहे थे, मेहमान दावत का लुत्फ उठा रहे थे और कुछ लोग डीजे की धुन पर थिरक रहे थे। इसी बीच प्रशासन की टीम पहुंची और दस्तावेज जांचे तो सामने आया कि दुल्हन बनने जा रही दोनों बालिकाएं विवाह योग्य उम्र की नहीं थीं। टीम ने मौके पर ही बाल विवाह रुकवा दिया।
मामला श्रीगंगानगर जिले में सदर थाना क्षेत्र के गांव 8 जैड का है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर मिली सूचना के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की। सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जोगेंद्र कौशिक, चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक त्रिलोक वर्मा, राजस्व पटवारी कंवलजीत सिंह और सदर थाना पुलिस के ड्यूटी ऑफिसर हरिओम शर्मा पुलिस जाब्ते के साथ विवाह स्थल पर पहुंचे।
टीम ने बालिकाओं के परिजनों से उनकी विवाह योग्य आयु 18 वर्ष पूर्ण होने के दस्तावेज मांगे। परिजनों ने आधार कार्ड और पांचवीं कक्षा की अंकतालिका पेश की। दस्तावेजों की जांच में एक बालिका की जन्मतिथि 11 अप्रैल 2009 और दूसरी की 5 जुलाई 2012 मिली। दोनों की उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण प्रशासन ने विवाह तत्काल रुकवा दिया।
प्रशासन ने दोनों बालिकाओं के 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक उनका विवाह नहीं करने के लिए परिजनों को पाबंद किया। मौके की फर्द तैयार कर परिवार और रिश्तेदारों के हस्ताक्षर भी करवाए गए। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक राजीव जाखड़ ने बताया कि परिजन जगह या समय बदलकर दोबारा विवाह का प्रयास न करें, इसके लिए बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ने मौके की निगरानी के लिए एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाई है। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने विवाह में सेवाएं दे रहे हलवाई और टेंट संचालक को भी बाल विवाह कानून की जानकारी देकर पाबंद किया। टीम की कार्रवाई देखकर रस्में करवाने वाला पाठी मौके से फरार हो गया।
मामले में जांच के दौरान बारातियों की उम्र भी सामने आई। पंजाब के अबोहर के पास वकैन वाला गांव से आई बारात में एक दूल्हे की जन्मतिथि 18 अप्रेल 2007 मिली। यानी वह भी विवाह के लिए निर्धारित 21 वर्ष की उम्र पूरी नहीं कर चुका था। दूसरे दूल्हे की उम्र विवाह योग्य दूल्हों के गृह थानों को भी इसकी सूचना दी। प्रशासन ने दोनों बारातों को वापस लौटा दिया और संबंधित दूल्हों के गृह थानों को भी इसकी सूचना दी।