सुरजपुर

New Labour Codes: कोल माइंस में 70 साल पुरानी वर्कर्स इंस्पेक्टर व्यवस्था खत्म, नई श्रम संहिता लागू होते ही बदला सुरक्षा तंत्र

New Labour Codes implemented: खनन क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक बदलाव आया सामने, वर्कर्स इंस्पेक्टर द्वारा फॉर्म यू में निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन एवं डीजीएमएस को भेजने की कानूनी अनिवार्यता भी खत्म
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Updated: 12 Jul 2026, 7:42 PM IST
New labour code
Workers inspector system, Coal mines (Photo source- CB)

बिश्रामपुर। देश के खनन क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक बदलाव सामने आया है। नई श्रम संहिता (New Labour Codes in SECL) के तहत लागू व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां केंद्रीय नियम 2026 प्रभावी होने के साथ ही खदानों में करीब 7 दशकों से चली आ रही वर्कर्स इंस्पेक्टर व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। साथ ही वर्कर्स इंस्पेक्टर द्वारा फॉर्म यू में निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन एवं डीजीएमएस को भेजने की कानूनी अनिवार्यता भी खत्म हो गई है। इस बदलाव को देश की कोयला खदानों (SECL) में श्रमिक प्रतिनिधित्व आधारित सुरक्षा प्रणाली के सबसे बड़े परिवर्तनों में से एक माना जा रहा है। इस संबंध में सभी संबद्ध ट्रेड यूनियनों को पत्र जारी कर नई कानूनी व्यवस्था की जानकारी दी गई है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) द्वारा 8 मई 2026 को अधिसूचना क्रमांक जीएसआर 345 (ई) जारी कर व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (केंद्रीय) नियम 2026 अधिसूचित किए गए हैं। ये नियम व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 की धारा 133 एवं 134 के तहत बनाए गए हैं।

इनके लागू होते ही खान नियम 1955 सहित कई पुराने केंद्रीय श्रम नियम स्वत: निरस्त हो गए हैं। गौरतलब है कि खान नियम 1955 के तहत प्रत्येक खदान में चुना गया वर्कर्स इंस्पेक्टर (Workers inspector service) श्रमिकों का वैधानिक प्रतिनिधि माना जाता था। उसे खदान की सुरक्षा व्यवस्था, कार्य परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं और संभावित खतरों का निरीक्षण करने का अधिकार प्राप्त था।

निरीक्षण के बाद वह फॉर्म यू में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर खदान प्रबंधन तथा महानिदेशालय खान सुरक्षा डीजीएमएस को भेजता था। यह व्यवस्था वर्षों तक श्रमिकों की भागीदारी पर आधारित सुरक्षा प्रणाली का मजबूत स्तंभ रही।

New Labour Code: नई अधिसूचना के बाद ये बदलाव

नई अधिसूचना के तहत लागू नियमों में अब वर्कर्स इंस्पेक्टर की नियुक्ति, निरीक्षण अधिकार अथवा फॉर्म यू रिपोर्ट का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसी आधार पर वर्तमान केंद्रीय नियमों के अनुसार अब वर्कर्स इंस्पेक्टर द्वारा निरीक्षण कराना या फॉर्म यू रिपोर्ट तैयार करना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है।

साथ ही यूनियनों (Coal unions) से अपेक्षा की गई है कि वे नई कानूनी व्यवस्था के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करें। यह बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि खदानों की सुरक्षा प्रणाली और श्रमिक प्रतिनिधित्व की पूरी संरचना को प्रभावित करेगा।

श्रमिक संगठनों के बीच हो रही ये चर्चा

एक ओर जहां सरकार का उद्देश्य सभी उद्योगों के लिए एक समान और आधुनिक सुरक्षा कानून लागू करना है, वहीं दूसरी ओर श्रमिक संगठनों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि पारंपरिक वर्कर्स इंस्पेक्टर व्यवस्था समाप्त होने से श्रमिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी किस रूप में सुनिश्चित होगी।

अब खदानों में सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों से संबंधित सभी प्रक्रियाएं ओएसएचडब्ल्यूसी संहिता 2020 तथा उसके तहत अधिसूचित केंद्रीय नियम 2026 के अनुसार संचालित होंगी। साथ ही भारतीय खनन उद्योग में लगभग 70 वर्षों से चली आ रही वर्कर्स इंस्पेक्टर प्रणाली (Workers' Inspector System) इतिहास का हिस्सा बन गई है और खदान सुरक्षा व्यवस्था एक नए कानूनी ढांचे में प्रवेश कर चुकी है।

Updated on:
12 Jul 2026, 7:42 PM IST
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