
US-Iran War सूरत। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव का असर अब सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेजी आने के बाद शहर में पॉलिएस्टर यार्न के दाम पिछले दो दिनों में प्रति किलो 6 से 10 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। युद्ध जैसे हालात बनने के बाद से अब तक यार्न की कीमतों में कुल 45 रुपये प्रति किलो से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
लगातार बढ़ती कीमतों से कपड़ा उद्योग, विशेषकर वीवर्स की उत्पादन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। यार्न कारोबारियों का कहना है कि क्रूड ऑयल महंगा होने, कच्चे माल की लागत बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के कारण यार्न के दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं, वीवर्स का कहना है कि जब भी कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, यार्न निर्माता तत्काल कीमतें बढ़ा देते हैं, लेकिन जब क्रूड ऑयल सस्ता होता है तो उसी अनुपात में यार्न के दाम कम नहीं किए जाते।
हाल ही में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आने पर यार्न के दाम में केवल 6 रुपये प्रति किलो की कटौती की गई थी, जबकि अब दो-चार दिनों के भीतर ही 10 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। सचिन इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसायटी के सचिव मयूर गोलवाला ने बताया कि क्रूड ऑयल महंगा होने का हवाला देकर यार्न के दाम बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन जब क्रूड ऑयल सस्ता होता है तब उसका लाभ वीवर्स को नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि पिछले दो-चार दिनों में ही यार्न की कीमत प्रति किलो 10 रुपये तक बढ़ गई है, जिससे वीवर्स को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद तैयार कपड़ों की कीमतों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जिससे बुनकरों का मार्जिन लगातार घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सूरत के लाखों वीवर्स पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबा खिंचने पर यार्न की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर सूरत के टेक्सटाइल उद्योग, उत्पादन लागत और कपड़ा कारोबार पर पड़ेगा। वीवर्स ने मांग की है कि यार्न कंपनियां कीमतों में पारदर्शिता बरतें और क्रूड ऑयल सस्ता होने पर उसका लाभ भी उद्योग को समान रूप से दिया जाए।
आपको बता दें कि यार्न वह धागा होता है जिससे कपड़ा बुना जाता है। यह कपास, पॉलिएस्टर या दूसरे रेशों से तैयार किया जाता है। वीवर्स (बुनकर) वे लोग या इकाइयां होती हैं जो इस यार्न को पावरलूम या दूसरी मशीनों पर बुनकर कपड़ा बनाती हैं। आसान शब्दों में यार्न कपड़ा बनाने का कच्चा माल है और वीवर्स उसी धागे से कपड़ा तैयार करने का काम करते हैं। सूरत का वस्त्र उद्योग बड़ी संख्या में ऐसे वीवर्स पर निर्भर है, जो हर दिन लाखों मीटर कपड़े का उत्पादन करते हैं।