
Rahul Ravindran new statement on Ketan Agrawal case: पुणे के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड (Ketan Agrawal Murder Case) की गूंज अब सिनेमाई गलियारों में बेहद तीखी होती जा रही है। रश्मिका मंदाना स्टारर आगामी तेलुगु फिल्म 'द गर्लफ्रेंड' (The Girlfriend) की तुलना इस मर्डर केस से किए जाने पर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर लगातार हो रही ट्रोलिंग और "महिलाओं द्वारा पुरुषों पर किए जा रहे अत्याचारों पर फिल्म बनाने" की मांग से तंग आकर निर्देशक राहुल रविंद्रन (Rahul Ravindran) ने एक बार फिर एक्स (X) पर अपनी बात रखी है। इस बार उनका अंदाज बेहद आक्रामक, कटाक्ष से भरा और तीखा है।
लगातार उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए राहुल रविंद्रन ने साफ किया कि वह हर मुद्दे पर राय रखने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने लिखा, "मैं कोई न्यूज आउटलेट नहीं हूं। मुझे हर चीज पर प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। मैं व्यक्तिगत रूप से किसी चीज पर प्रतिक्रिया नहीं देता। पिछले दिनों मैंने ट्वीट सिर्फ इसलिए किया था क्योंकि मुझे सीधे टैग करके सवाल पूछा गया था, जिसमें मेरी फिल्म पर बिना सोचे-समझे पक्षपात का आरोप लगाया गया था।"
लगातार हो रहे हमलों के बाद राहुल रविंद्रन ने हार मानने के बजाय ट्रोलर्स पर ऐसा तंज कसा, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। उन्होंने बेहद व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "आप सभी ने मेरा मन बदल दिया है, भाई। मुझे बताओ कि आप क्या चाहते हैं कि मैं कहूं ताकि आप खुश हो जाएं? मैं कोशिश करता हूं।"
इसके बाद उन्होंने एक नया 'बयान' जारी करते हुए लिखा, "महिलाएं खतरनाक होती हैं। पुरुषों, सावधान रहो। सतर्क रहो। वह पीड़ित नहीं हैं, बल्कि बहुत सारे पुरुष महिलाओं द्वारा पीड़ित हो रहे हैं। वह अब बड़े पैमाने पर एक सामाजिक समस्या बन गई हैं और पुरुषों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं, लड़कों। और हां, पितृसत्ता अब मौजूद नहीं है, यह सिर्फ एक भ्रम है।"
अपनी बात के अंत में राहुल ने उस मांग पर सीधा प्रहार किया, जिसमें उनसे पुरुषों पर होने वाले अत्याचार पर फिल्म बनाने को कहा जा रहा था। उन्होंने गुस्से में लिखा, "मुझे पुरुषों पर महिलाओं के अत्याचारों के बारे में एक फ़िल्म बनानी चाहिए और मैं बनाऊँगा। अब समय आ गया है। ऐसा लगता है कि हर साल महिलाओं द्वारा पुरुषों की एक-दो विवादास्पद हत्याएँ होती हैं, इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। मैं एक ऐसी फ़िल्म बनाऊँगा जो उन्हें और बड़े पैमाने पर भारतीय महिलाओं की ज़हरीली सोच को बेनकाब करेगी।" निर्देशक का यह बयान साफ तौर पर उन लोगों के लिए एक करारा थप्पड़ है जो सिनेमा को एकतरफा चश्मे से देखते हैं।