टोंक

Fake Milk: इस जिले से रोज हो रही थी 80 हजार लीटर नकली दूध की सप्लाई, फैक्ट्री पहुंची पुलिस के भी उड़े होश

पुलिस की जिला स्पेशल टीम ने नकली दूध बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में मिलावटी दूध, रसायन और वाहन जब्त किए गए हैं।

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Feb 03, 2026
दूध की जांच करती टीम। फोटो- पत्रिका

टोंक। मालपुरा पुलिस की जिला स्पेशल टीम ने नकली दूध बनाने की फैक्ट्री का खुलासा किया है। टीम ने मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में नकली दूध बनाने की सामग्री और दूध से भरे वाहन भी जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई मालपुरा क्षेत्र के डिग्गी में की गई।

पुलिस अधीक्षक राजेशकुमार मीना ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में खंडाज थाना बांदर सिंदरी, जिला अजमेर निवासी राजू पुत्र जीवराज, कठमाणा थाना झिराना निवासी कालू पुत्र गोवर्धन मेघवंशी, ढसूक थाना अराई जिला अजमेर निवासी महिपाल पुत्र रामराज जाट, कटसुरा थाना अराई जिला अजमेर निवासी शिवराज पुत्र कालू जाट और छोटीकनाई थाना भिनाय जिला अजमेर निवासी ओमप्रकाश पुत्र बद्रीलाल वैष्णव शामिल हैं। यह फैक्ट्री बहरोड़ निवासी सोनू यादव की ओर से संचालित की जा रही थी, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

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नकली दूध बनाकर बेचने की शिकायत

मालपुरा के डिग्गी क्षेत्र में नकली दूध बनाकर बेचने की शिकायत मिली थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मालपुरा पुष्पेंद्र सिंह के निर्देशन में पुलिस उपाधीक्षक मालपुरा आशीष प्रजापत के सुपरविजन में डीएसटी प्रभारी ओमप्रकाश के नेतृत्व में टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा। फैक्ट्री में नकली दूध बनते देख टीम भी चौंक गई। कार्रवाई में कांस्टेबल राधामोहन, शिवपाल, प्रधान, रुकमेश, राधाकिशन और राजेशकुमार शामिल रहे।

इनको किया जब्त

टीम ने मौके से 5500 लीटर मिलावटी दूध, दूध से भरी पांच पिकअप, दूध से भरा एक टैंकर, 2100 लीटर सोयाबीन ऑयल, 500 लीटर वनस्पति घी, 550 किलो मिल्क पाउडर, 2500 किलो यूरिया और 105 किलो कास्टिक सोडा जब्त किया है।

80 हजार लीटर रोजाना करते थे सप्लाई

पुलिस उपाधीक्षक आशीष प्रजापत ने बताया कि इस फैक्ट्री में प्रतिदिन करीब 80 हजार लीटर नकली दूध तैयार किया जाता था। यह दूध अजमेर, जयपुर और टोंक में सप्लाई किया जाता था। दूध खुले रूप में दुकानदारों और दूध डेयरियों को दिया जाता था। मामले में उन डेयरी संचालकों से भी पूछताछ की जाएगी, जो इस दूध को आगे दूध संघ को सप्लाई करते थे।

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फैट देख चौंक गई टीम

टीम ने जब दूध को देखा तो वह गुणवत्ता में सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन जब फैट की जांच की गई तो वह 9 फैट निकली, जो आमतौर पर भैंस के दूध में होती है। इसी कारण दूध डेयरियों पर इस मिलावटी दूध की प्रति किलो अच्छी कीमत मिलती थी।

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