
मालपुरा-टोंक । इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) की सलाया-मथुरा क्रूड ऑयल पाइपलाइन में सेंध लगाने के मामले की जांच में राजस्थान में सक्रिय अंतरराज्यीय पाइपलाइन टैपिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार गिरोह ने पूछताछ में अजमेर जिले के मोतीपुरा और देवरा गांव में भी तेल चोरी की वारदात स्वीकार की है। टोंक जिले के पचेवर क्षेत्र में हुई चोरी के मामले में छह राज्यों से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह यहां से करीब 20 हजार लीटर क्रूड ऑयल चुराने की तैयारी में था। गौरतलब है कि इस लाइन से कच्चा तेल करीब 800 किलोमीटर दूर पानीपत रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है।
8 जुलाई को लड़ी गांव के पास निरीक्षण के दौरान भूमिगत पाइपलाइन से करीब 30 फीट लंबी अतिरिक्त पाइप और वाल्व जुड़ा मिला। आरोपियों ने खेत में करीब 40 फीट तक खुदाई कर ड्रिल मशीन से पाइपलाइन में छेद किया और विशेष वाल्व लगाकर अवैध कनेक्शन तैयार किया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह ने बताया, शनिवार को आरोपियों को अदालत में पेश किया। अदालत ने तीन दिन का पुलिस रिमांड दिया है। पुलिस के अनुसार, 60 वर्षीय मुनेश कुमार उर्फ फौजी गिरोह का मास्टरमाइंड है, जो देशभर में पाइपलाइन टैपिंग की दो दर्जन से अधिक वारदातों में शामिल रहा है।
गिरफ्तार आरोपियों में सतनाम सिंह (पंजाब), अजय सिंह वाघेला (गुजरात), राजेश कुमार और अनीश कुमार (हरियाणा), धर्मेंद्र व जाकिर हुसैन (मध्य प्रदेश), मोहनलाल गुर्जर और गोपाल गुर्जर (व्यावर), नाथूराम गुर्जर (अजमेर), शंकरलाल गुर्जर तथा प्रभुलाल बैरवा (पचेवर) शामिल है। पुलिस अन्य राज्यों में दर्ज ऑयल चोरी के मामलों से भी गिरोह के संबंधों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार गिरोह ने वारदात का एक नया तरीका बताया। पहले कई दिनों तक पाइपलाइन की रेकी की जाती थी। इसके बाद रात में खेतों के रास्ते पहुंचकर खुदाई कर पाइपलाइन में छेद किया जाता, विशेष वाल्व लगाया जाता और अतिरिक्त पाइप के जरिए कच्चा तेल निकालने की तैयारी की जाती थी।
यह मामला आइओसीएल की पाइपलाइन सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। जिस स्थान पर सेंध लगाई गई, वहां कई फीट तक खुदाई कर पाइपलाइन में ड्रिलिंग की गई और अतिरिक पाइप जोड़ दी गई, लेकिन नियमित निगरानी के दौरान इसका पत् नहीं चल सका। कंपनी के अनुसार पाइपलाइन की प्रतिदिन पैदला और मोटरसाइकिल से निगरानी की जाती है। घटना का खुलासा तब हुआ, जब पाइपलाइन के प्रेशर में कमी दर्ज हुई।
राजस्थान में इससे पहले शाहजहांपुर, बगरू, कोटपूतली, सेंदड़ा (ब्यावर), रायपुर (पाली), महुवा और अलवर में भी पाइपलाइन टैपिंग के मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी 2026 में ब्यावर के सेंदड़ा क्षेत्र में भूमिगत पाइपलाइन के समानांतर 120 मीटर लंबी अवैध पाइपलाइन बिछाने का मामला भी सामने आया था।