टोंक

कभी ‘कुंवारी’ तो कभी ‘विधवा’ बनी महिला, सरकारी नौकरी पाने के लिए बदली पहचान, गांव वालों ने रंगे हाथ पकड़ा

टोंक में चतुर्थ श्रेणी भर्ती के दौरान एक महिला पर विधवा कोटे का गलत लाभ लेने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने उसे शादीशुदा बताते हुए फर्जी दस्तावेज देने की शिकायत की। मामला अब ग्रीवेंस कमेटी में जाएगा।

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Apr 25, 2026
Married Woman Accused of Using Fake Widow Status for Govt Job in Rajasthan Recruitment Probe
सरकारी नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी (फोटो-एआई)

टोंक: राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। टोंक जिले की एक महिला अभ्यर्थी पर आरोप लगा है कि उसने ग्रेड फोर्थ कर्मचारी भर्ती में 'विधवा-परित्यक्ता' कोटे का लाभ लेने के लिए खुद को विधवा बताया और फर्जी दस्तावेज पेश किए।

शुक्रवार को जब अजमेर के तोपदड़ा स्कूल में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही थी, तब ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर महिला के शादीशुदा होने के सबूत पेश कर दिए, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।

अलग-अलग परीक्षाओं में बदली वैवाहिक स्थिति

ग्रामीणों द्वारा शिक्षा अधिकारियों को सौंपे गए 28 पेज के विस्तृत ब्यौरे के अनुसार, महिला अभ्यर्थी ने अलग-अलग भर्तियों में अपनी सुविधा के अनुसार जानकारी बदली। 2021 (VDO भर्ती) में महिला ने खुद को विधवा बताकर आवेदन किया। मार्च 2022 (PTET आवेदन) में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में आवेदन के दौरान उसने खुद को 'अविवाहित' बताया और विधवा श्रेणी से इनकार किया।

वहीं, अक्टूबर 2022 (CET स्नातक स्तर) में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की इस परीक्षा में उसने पुन: खुद को 'विधवा' दर्शाया। ग्रामीणों का दावा है कि महिला ने 14 फरवरी 2022 को भीलवाड़ा जिले में दूसरी शादी कर ली थी, जिसके फोटो भी अधिकारियों को दिखाए गए हैं।

विधवा पेंशन का भी उठाया लाभ

शिकायतकर्ताओं ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि महिला ने गलत तरीके से विधवा पेंशन योजना का लाभ लिया। हालांकि, ग्रामीणों की सजगता और पहले की गई शिकायतों के बाद जांच हुई, जिसमें सच सामने आने पर उसकी पेंशन बंद कर दी गई थी।

ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से इस महिला की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और जैसे ही उन्हें शुक्रवार को उसके डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की सूचना मिली, वे साक्ष्यों के साथ तोपदड़ा स्कूल पहुंच गए।

विभागीय कार्रवाई और जांच

शुरुआत में शिक्षा अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा दिखाए गए शादी के फोटो पर यह कहते हुए सवाल उठाया कि बिना ठोस प्रमाण के इसे दूसरी शादी कैसे माना जाए। हालांकि, मामले की गंभीरता और विरोधाभासी दस्तावेजों को देखते हुए विभाग ने इसे जांच के दायरे में ले लिया है।

संयुक्त निदेशक डॉ. महावीर शर्मा के मुताबिक, अभ्यर्थी के विरुद्ध शिकायत और कुछ दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। इस प्रकरण को जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की 'परिवेदना समिति' के समक्ष रखा जाएगा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर मामले को अंतिम निर्णय के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजा जाएगा।

Published on:
25 Apr 2026 11:24 am