
Devoleena Bhattacharjee post: देश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में होने वाली देरी को लेकर आम जनता के साथ-साथ अब फिल्मी हस्तियां भी खुलकर अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। इसी कड़ी में टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी(Devoleena Bhattacharjee) ने सोशल मीडिया पर एक बेहद तीखा और भावुक पोस्ट शेयर किया है। देवोलीना ने बिना किसी का नाम लिए देश की राजनीतिक पार्टियों, सरकारों और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका यह पोस्ट इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है। इसने सोशल मीडिया पर 2 गुटों में बांध दिया है।
देवोलीना ने अपने पोस्ट की शुरुआत राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हुए की। उन्होंने लिखा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन प्रधानमंत्री बनता है, कौन मुख्यमंत्री बनता है, या किस राजनीतिक पार्टी की सरकार है। अगर कोई सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित नहीं रख सकती, बढ़ते अपराधों पर काबू नहीं पा सकती और सभी के लिए कानून का शासन समान रूप से लागू नहीं कर सकती, तो फिर शासन का असली मतलब क्या है?"
अभिनेत्री ने देश के बुनियादी ढांचे के विकास पर बात करते हुए कहा कि तरक्की जरूरी है, लेकिन कोई भी पुल, हाईवे या बड़ा प्रोजेक्ट सरकार की उस बुनियादी जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकता, जो अपने नागरिकों की रक्षा करना और उन्हें समय पर न्याय दिलाना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज भी वीआईपी (VIP) और प्रभावशाली लोगों को खास सुविधाएं मिलती हैं, जबकि देश का आम नागरिक उत्पीड़न और कभी न खत्म होने वाले संघर्षों का सामना करता रहता है।
देवोलीना ने देश की सैन्य ताकत और आंतरिक सुरक्षा के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "हम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुश्किल ऑपरेशन करने और अपनी सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। तो फिर हम अपने ही शहरों और समुदायों में अपराधों से अपने लोगों को बचाने में क्यों संघर्ष कर रहे हैं? बलात्कारी और हत्यारे अक्सर सजा से कैसे बच जाते हैं? अपराध की दरें हमारे लिए चिंता का विषय क्यों बनी हुई हैं?"
इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और संस्थानों में फैले भ्रष्टाचार पर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सवाल किया कि जो लोग भ्रष्टाचार और लापरवाही से छात्रों का भविष्य खतरे में डालते हैं, उन्हें पूरी तरह जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जाता? सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने पर मिलने वाली धमकियों और पीड़ितों को न्याय मिलने में लगने वाले सालों के इंतजार पर भी उनका दर्द छलका। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति का मकसद जनसेवा होना चाहिए, न कि निजी फायदा या परिवारवाद को बढ़ावा देना। डर और अनिश्चितता के माहौल में कोई भी देश सच में तरक्की नहीं कर सकता।