
उदयपुर। दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में गिरफ्तार एएसपी मुकेश सोनी और दलाल सज्जनसिंह जैन को लेकर परिवादी निरंजन मोगरा ने एसीबी के सामने दिए बयानों में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवादी का कहना है कि वर्ष 2022 में निगम के भूखंड प्रकरण में तत्कालीन एएसपी कंवल सिंह तंवर ने उसके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे सरकारी गवाह बनाया था। बाद में उसी मामले में उसे और उसकी पत्नी हेमलता कांकरिया को आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया। निरंजन के अनुसार, जमानत पर बाहर आने के बाद एएसपी सोनी ने दलाल सज्जन सिंह के जरिए उस पर लगातार दबाव बनाया। पहले एक करोड़ रुपए मांगे और फिर यह रकम बढ़ाकर दो करोड़ कर दी गई। रकम नहीं देने पर एएसपी ने दूसरे भूखंडों में झूठा फंसाने और चार्जशीट पेश करने की धमकी दी।
एसीबी ने शनिवार रात नगर निगम के बहुचर्चित 272 भूखंड घोटाले में दो करोड़ की कथित रिश्वत मामले में दलाल सज्जनसिंह जैन उर्फ टाटला को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रविवार को एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को मजिस्ट्रेट के आवास पर पेश किया, जहां उन्हें 30 सितम्बर तक रिमांड पर रखने के आदेश दिए।
एसीबी टीम रविवार रात आरोपी एएसपी मुकेश सोनी और दलाल सज्जनसिंह जैन को लेकर गोवर्धनविलास स्थित एसओजी कार्यालय में पहुंची और तलाशी ली। एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा के नेतृत्व में टीम ने प्रकरण से संबंधित एक फाइल जब्त की। तलाशी के दौरान अलमारी में नगर निगम के भूखंडों से संबंधित करीब 42 फाइलें भी मिली हैं। टीम ने संबंधित रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
निरंजन ने एसीबी को बताया कि सेक्टर-6 स्थित भूखंड संख्या 115 से जुड़े एफआइआर प्रकरण संख्या 97/22 में तत्कालीन एएसपी कंवल सिंह तंवर ने वर्ष 2022 में उसके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे सरकारी गवाह बनाया था। बाद में एएसपी मुकेश सोनी ने न्यायालय की अनुमति के बिना गिरफ्तार कर लिया। इसी प्रकरण में उसकी और पत्नी की गिरफ्तारी के बाद मामला न्यायालय पहुंचा। एफआइआर में दोनों के नाम नहीं थे और इसी आधार पर न्यायालय से उन्हें जमानत मिली। दोनों को करीब 14 दिन जेल में रहना पड़ा।
परिवादी निरंजन ने एक अन्य भूखंड संख्या 669 का भी जिक्र किया है। उसकी पत्नी हेमलता कांकरिया ने सेक्टर-5 स्थित इस भूखंड को खरीदने के लिए एग्रीमेंट किया था। मौके पर विवाद सामने आने के बाद एग्रीमेंट निरस्त कर दिया गया था। परिवादी के मुताबिक, भूखंड मालिक दिनेश मेहता ने वर्ष 2020 में हिरणमगरी थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। जांच के बाद इसमें एफआर लगा दी गई थी। परिवादी ने एसीबी को बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट से उसकी पत्नी को राहत मिल चुकी थी। इसके बावजूद दंपती को उसी भूखंड प्रकरण में गिरफ्तार किया गया।
निरंजन ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उसकी और पत्नी की गिरफ्तारी के दौरान एएसपी सोनी ने प्रकरण के अलावा घर से दूसरी प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात, सीसीटीवी की डीवीआर, सोने की घड़ी और दो सोने की चूड़ियां जब्त की। इसके अलावा रीडर की ओर से उसकी पत्नी के एसबीआइ खाते से जुड़े तीन चेक पर खाली हस्ताक्षर भी करवाए। परिवादी का कहना है कि इन दस्तावेज को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। आरोप है कि दस्तावेज और अन्य सामान वापस करने के नाम पर दलाल सज्जनसिंह के जरिए लगातार दबाव बनाया गया। उसे दूसरे भूखंड मामलों में भी गिरफ्तार करने और अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर फंसाने की धमकियां दी गईं।
परिवादी निरंजन ने एसीबी को बताया कि उसने रकम की मांग के दौरान दलाल सज्जनसिंह से एएसपी मुकेश सोनी से आमने-सामने बात कराने को कहा था। इसके बाद सज्जनसिंह उसे कार से रानी रोड ले गया, जहां उसकी एएसपी मुकेश से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में सोनी ने मोबाइल पर लिखकर कथित तौर पर दो करोड़ रुपए की मांग की। 24 सितम्बर को एएसपी सोनी बालोतरा चला गया और बाद में वह दलाल के लगातार संपर्क में रहा।