
यू-टर्न का खेल बंद करो। फोटो: पत्रिका
जयपुर। जेडीए का यू-टर्न अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। एसी कमरे में तैयार डिजाइन में तीन लेन थीं, लेकिन जमीन पर दो लेन भी जैसे-तैसे समा पाई। जगतपुरा के हरे कृष्णा मार्ग (महल रोड) पर यू-टर्न बनाते समय कहीं फुटपाथ हटाया गया तो कहीं ग्रीन बेल्ट उखाड़कर डामर बिछा दिया गया। मूल डिजाइन में आंसू के आकार वाला डबल लूप था, मौके पर उसका आकार ही बदल गया। आकार बनाने की कोशिश हुई, लेकिन ज्यामिति व यातायात प्रवाह बदल गया।
यू-टर्न को ट्रैफिक आसान करना था, उसमें कंटेनर फंस गए और भारी वाहनों पर ही पाबंदी लगानी पड़ी। किरकिरी से बचने के लिए जेडीए अधिकारी भारी वाहन निकालने के वीडियो जारी कर प्रोजेक्ट सफल बताने में जुटे हैं। इधर, डिजाइन के कागज पर पास, जमीन पर फेल होने की नौबत है।
मूल डिजाइन: सामान्य यू-टर्न नहीं, बल्कि डबल टीयरड्रॉप यानी आंसू के आकार में डबल लूप था। वाहनों को बिना रुके निर्धारित घुमाव से निकालना था। विशेषज्ञ के अनुसार डिजाइन का करीब 60-70% ही जमीन पर उतरा।
आइलैंड की आकृति बदली: डिजाइन में आइलैंड आंसू के आकार का था, जिसकी नोक वाहन को सही कोण पर मोड़ने में मदद करती। मौके पर इसे गोल-अंडाकार कर दिया गया।
बीच का जोड़ गायब: मूल डिजाइन में दोनों यू-टर्न के बीच छोटा मध्य भाग था। मौके पर दोनों लूप के बीच बड़ा अंतर छोड़कर बीच में पैदल पार-पथ बना दिया गया।
बाहरी लेन का फैलाव भी नहीं: डिजाइन में यू-टर्न से पहले सड़क का हल्का फैलाव था, जिससे सीधे और मुड़ने वाले वाहनों का मार्ग अलग होता। मौके पर सड़क सीधी रखी गई।
हरे कृष्णा मार्ग जगतपुरा आरओबी से द्रव्यवती नदी कल्वर्ट तक करीब सात किलोमीटर लंबा अहम मार्ग है। टोंक रोड पर मेट्रो का काम गति
पकड़ने पर यहां यातायात का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सवाल है कि जब अभी भारी वाहन यू-टर्न में फंस रहे हैं तो भविष्य का बढ़ा यातायात कैसे संभलेगा?
विशेषज्ञ बोले: पहले बताई थीं खामियां, नहीं हुई सुनवाई
यू-टर्न की सफलता सिर्फ आकार बनाने से तय नहीं होती। ज्यामिति, मोड़ की त्रिज्या, लेन की चौड़ाई और वाहनों के मार्ग का अलगाव मूल डिजाइन के अनुरूप होना जरूरी है। बदलाव से यातायात प्रवाह प्रभावित हो सकता है। महल रोड जैसे मार्ग पर भविष्य के दबाव को देखते हुए मौके का तकनीकी परीक्षण जरूरी है। इसकी डिजाइन को लेकर मैंने जेडीए अधिकारियों को पत्र भी दिया था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
-राजकुमार शर्मा, सेवानिवृत्त, अतिरिक्त मुख्य निदेशक, अभियांत्रिकी शाखा, जेडीए
Updated on:
28 Sept 2026 08:34 am
Published on:
28 Sept 2026 08:34 am
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