उदयपुर में भाजपा नेत्री से जुड़े वीडियो कांड पर सियासी हलचल तेज है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी की चर्चा के बीच संगठन डैमेज कंट्रोल में जुटा है। आरोपी विशाल गुर्जर की जमानत खारिज कर दी गई है।
उदयपुर: भाजपा नेत्री से जुड़े चर्चित वीडियो कांड के कारण संगठनात्मक और वैचारिक स्तर पर हलचल जारी है। प्रकरण को लेकर आरएसएस में नाराजगी की खबरों ने स्थानीय भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।
डैमेज कंट्रोल में जुटे नेताओं ने संघ पदाधिकारियों से संवाद का प्रयास किया। लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया। इसके बाद से शहर के भाजपा खेमे में बेचैनी साफ नजर आ रही है।
वीडियो कांड ने उदयपुर की राजनीति को असहज मोड़ पर ला खड़ा किया है। एक ओर पुलिस जांच अपने स्तर पर आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर संगठनात्मक अनुशासन और छवि बचाने की चुनौती सामने है।
संघ की नाराजगी और आलाकमान की सख्ती के बीच स्थानीय नेतृत्व की परीक्षा हो रही है। अब नजर इस बात पर है कि जांच से क्या नए तथ्य सामने आते हैं और पार्टी संगठन किस दिशा में कदम उठाता है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वीडियो कांड को लेकर पार्टी में चल रही गतिविधियों की निगरानी मुख्यमंत्री स्तर पर की जा रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जा चुकी है। मामले में प्रदेशस्तर के कुछ नेताओं के नाम चर्चा में आने से त्वरित और कठोर निर्णय लेने की स्थिति नहीं बन पा रही है।
संगठनात्मक फेरबदल की अटकलों के बीच उदयपुर में भाजपा संयोजक मनोनीत किए जाने को लेकर रायशुमारी शुरू हो गई है। स्थानीय नेताओं को फोन कर संभावित नामों पर फीडबैक लिया जा रहा है। संकेत है कि संगठन की पकड़ मजबूत करने और संदेश देने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
भाजपा नेत्री को सुबह होते ही वीडियो वायरल करने की धमकी दिए जाने के बाद पुलिस ने देर रात कार्रवाई की थी। कार्रवाई का निर्णय परिस्थितिजन्य रूप से उचित बताया गया, लेकिन पुलिस के साथ भाजपा नेता की मौजूदगी ने विवाद को जन्म दे दिया। वायरल वीडियो में गोगुंदा के भाजपा नेता की मौजूदगी से सवाल उठ रहा है कि वह किसके इशारे पर आरोपी के घर पहुंचा।
वीडियो वायरल करने की धमकी से लेकर जेल पहुंचने तक आरोपी विशाल की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक दृष्टिकोण से सवाल उठ रहे है। क्या उसने महज आर्थिक लालच में ऐसा किया या किसी दबाव में आकर यह कदम उठाया? जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी को दिशा देने वाले चेहरे कौन थे।
निचली कोर्ट से आरोपी विशाल गुर्जर की जमानत खारिज होने के बाद परिजनों ने सेशन कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे भी कोर्ट ने खारिज कर दी। अब परिवार की ओर से जोधपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाने की तैयारी की गई है। हालांकि, अदालत में लगातार अवकाश के कारण होली से पहले सुनवाई की संभावना कम है। ऐसे में संभव है कि आरोपी की होली जेल में ही बीतेगी।
सामने आया है कि विशाल गुर्जर की हरकतें पूर्व में भी विवादित रही है। भाजपा नेत्री से पहले भी वह कथित रूप से कई लोगों को ब्लैकमेल कर चुका है। उसके संपर्क में रही एक महिला प्रताड़ना के चलते दूरी बना चुकी है, जबकि एक अन्य महिला ने बड़गांव थाने में ब्लैकमेलिंग की रिपोर्ट दी थी। भाजपा नेत्री वाला मामला सार्वजनिक होने के बाद कई अन्य लोग भी पुलिस से संपर्क कर चुके हैं, जो विशाल से प्रताड़ित हो चुके हैं।