
BSP Election Strategy: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और पुराने नेताओं की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि BSP किसी एक समाज या व्यक्ति के भरोसे नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और सर्वसमाज के हित की नीति पर काम करती है। मायावती ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने निजी और पारिवारिक स्वार्थ के लिए पार्टी से फायदा उठाया, लेकिन अपने समाज और संगठन के लिए सक्रिय नहीं रहे। उन्होंने ऐसे लोगों के कारण चुनावों में पार्टी को हुए नुकसान का भी जिक्र किया।
मायावती ने ब्राह्मण समाज समेत दूसरे समाजों से जुड़े उन लोगों पर निशाना साधा, जिन्हें पार्टी से निकाला गया, जो खुद दूसरी पार्टियों में चले गए या अपने गलत कामों से बचने के लिए सत्ताधारी दल में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल उठते रहे हैं।
मायावती ने कहा कि BSP सरकार के दौरान भी कुछ लोगों ने अपने निजी और पारिवारिक हितों के लिए पार्टी से ज्यादा फायदा उठाया, जबकि अपने समाज और संगठन के हित में वे सक्रिय नहीं रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने अपने समाज को भी सही तरीके से BSP से नहीं जोड़ा। इन कारणों से पार्टी को पिछले कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों में नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह बात किसी से छिपी नहीं है। पार्टी की अपेक्षा के मुताबिक समाज को संगठन से जोड़ने की जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभाई गई, जिसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि इसके बाद पार्टी में लंबे समय से ईमानदार और लगातार समर्पित वरिष्ठ कार्यकर्ता नए लोगों और खासकर युवाओं को संगठन से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
मायावती ने ब्राह्मण समाज से भी BSP से मजबूती के साथ जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनावों में उनकी तैयारी और भूमिका के आधार पर उन्हें उम्मीदवार बनाने में भागीदारी दी जाती रहेगी। सरकार बनने पर साल 2007 की तरह ब्राह्मण समाज समेत सभी समाजों को उचित सम्मान देने का भरोसा भी उन्होंने जताया।
उन्होंने कहा कि सर्वसमाज आधारित BSP को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अब खासकर दलित समाज को अहम भूमिका निभानी होगी। मायावती ने कहा कि पार्टी की संगठनात्मक नर्सरी सर्वसमाज के लोगों से ही मजबूत और सक्रिय बनी रहती है।