Main Door Vastu Tips : घर बनवाते समय की गई छोटी गलतियां बाद में तनाव और आर्थिक परेशानी की वजह बन सकती हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक किचन, मुख्य दरवाजा, टॉयलेट और सीढ़ियों की गलत दिशा घर की सकारात्मक ऊर्जा पर असर डालती है। जानिए नए घर में किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
Vastu Tips for New Home: हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर सिर्फ दिखने में खूबसूरत न हो, बल्कि वहां खुशी, तरक्की और सुकून भी मिले। शायद इसी वजह से नए घर की शुरुआत से पहले लोग आज भी वास्तु शास्त्र के नियमों पर खूब ध्यान देते हैं। वास्तु जानने वाले मानते हैं कि प्लॉट की दिशा से लेकर मुख्य दरवाजे, किचन, पानी की टंकी जैसी चीजें पूरे घर के माहौल को बदल सकती हैं। एस्ट्रोलॉजर और वास्तु विशेषज्ञ सुरेश शर्मा के अनुसार कई बार स्टाइलिश डिजाइन के चक्कर में इतनी बेसिक गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा सालों तक भुगतना पड़ जाता है।
सबसे पहली और आम चूक – प्लॉट की दिशा और आकार को हल्के में लेना। वास्तु में चौकोर या आयताकार प्लॉट सबसे बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि इनमें स्थिरता और संतुलन रहता है। टेढ़े-मेढ़े या नुकीले कोनों वाले प्लॉट को शुभ नहीं समझा जाता। वैसे तो उत्तर या पूर्वमुखी प्लॉट सबसे अच्छे माने जाते हैं, इन्हें पॉजिटिव एनर्जी का सोर्स कहा गया है। अगर कोई दक्षिण या पश्चिममुखी प्लॉट ले रहा है तो पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।
मुख्य दरवाजा, यानी एंट्री गेट, घर की एनर्जी का रास्ता होता है। अगर ये गलत दिशा में बन जाए, तो पूरे घर का माहौल बदल सकता है। उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व में बना मुख्य द्वार वास्तु के लिहाज से परफेक्ट रहता है। ध्यान रहे, दरवाजे के ठीक सामने कोई भारी सामान, खंभा या गंदगी नहीं होनी चाहिए, इससे पॉजिटिव एनर्जी रुकी-रुकी सी महसूस होती है।
किचन की बात करें तो घर का किचन विश्वास ही नहीं, विज्ञान के नजरिए से भी अग्नि तत्व का प्रतीक होता है। वास्तु के मुताबिक दक्षिण-पूर्व दिशा किचन के लिए बेस्ट है। अगर किसी वजह से ये मुमकिन न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा भी चल सकती है। सबसे बड़ी गलती होती है – किचन को उत्तर-पूर्व में बनवा देना। और हां, खाना बनाते वक्त स्टोव का मुंह पूर्व की ओर हो तो सबसे अच्छा।
मास्टर बेडरूम – यानी घर के मुखिया का कमरा – दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनवाएं तो बढ़िया रहता है। ये दिशा मजबूती और स्थिरता देती है। उत्तर-पूर्व में मास्टर बेडरूम बनवाने से वास्तु विशेषज्ञ बचने की सलाह देते हैं। बच्चों या मेहमानों के कमरे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम की ओर रखें तो ज्यादातर अच्छा रहता है।
अब बात करें घर के उत्तर-पूर्व कोने की, जिसे वास्तु में सबसे पवित्र हिस्सा माना गया है। यहां भारी कंस्ट्रक्शन, स्टोर रूम, टॉयलेट या सीढ़ियां बनवा दीं तो समझिए एनर्जी का संतुलन तुरंत बिगड़ सकता है। सबसे अच्छा है कि इस हिस्से को खुला और साफ़-सुथरा रखें, यहां पूजा घर या मेडिटेशन रूम भी बना सकते हैं।
गलती से भी टॉयलेट घर के बीच में या उत्तर-पूर्व दिशा में न बनवाएं। ऐसा होने पर मनमुटाव या पारिवारिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। टॉयलेट के लिए वेस्ट या उत्तर-पश्चिम दिशा सबसे ठीक बैठती है।
सीढ़ियों की सही जगह को लेकर भी लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। घर के बीच में, यानी ब्रह्मस्थान में सीढ़ी बनवाना बड़ा वास्तु दोष माना गया है। इसके लिए दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा बेहतर है।
आजकल फ्लैट्स और छोटे घरों में जगह की कमी के कारण कई बार धूप और हवा की अनदेखी हो जाती है। लेकिन पूर्व दिशा से आती नेचुरल लाइट घर को पॉजिटिव बनाए रखती है, जबकि बंद और अंधेरे कमरे नेगेटिव इन्फ्लुएंस को बढ़ाते हैं।
पानी की टंकी का वास्तु भी अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। ज़मीन के नीचे पानी की टंकी उत्तर-पूर्व में और ऊपर की टंकी दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनवाएं तो सही रहता है। पानी जैसी भारी संरचना अगर गलत दिशा में हो जाए तो घर में नेगेटिविटी पनप सकती है।
कई लोग निर्माण से पहले भूमि पूजन करना या सही समय देखकर नींव रखना जरूरी मानते हैं। माना जाता है कि शुरुआत के वक्त की गई पूजा-प्रार्थना घर में बरकत लाती है। आज के आर्किटेक्ट्स भले कहें कि हर वास्तु नियम अपनाना मुश्किल है, मगर बेसिक रूल्स फॉलो करने से बाद में भारी बदलाव या खर्च से बचा जा सकता है।
आधुनिक डिजाइन और वास्तु में सही संतुलन बना लें। अब आर्किटेक्ट और वास्तु एक्सपर्ट साथ मिलकर ऐसे घर डिज़ाइन करते हैं जो दिखने में मॉडर्न भी हों, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं से भी मेल खाते हों। शुरुआत में थोड़ा ध्यान रखेंगे तो आपका घर सिर्फ चार दीवारी नहीं रहेगा, बल्कि सुकून और खुशहाली से भरा अपना सच्चा घर बनेगा।