
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त तेवरों ने अधिकारियों की नीद उड़ा दी है। बनारस में पेयजल योजना को लेकर जमकर खेल हुआ है। लोगों के घरों तक पेयजल पहुंचाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया था इसके बाद भी शहर की बड़ी आबादी आज भी पानी के लिए तरह रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 1000 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों को पानी नहीं मिलने को गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार अधिकारियों की सूची तैयार कर उन्हें जुलाई में जेल भेजने का निर्देश दिया है इसके बाद अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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बनारस भले की मोक्षदायिनी गंगा के किनारे बसा हुआ है लेकिन शहर की बड़ी आबादी आज भी प्यासी है। यूपी सरकार ने लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया था इसके बाद भी सरकारी भ्रष्टाचार ने लोगों को प्यासा रखा। जल निगम (पेयजल) ने वरुणापार के लोगों व शहर के अन्य हिस्से में पेयजल पहुंचाने के लिए शहर में 26 ओवरहैड टैंक बनाये गये थे लेकिन आज तक सभी घरों तक पानी नहीं पहुंचा है। ओवरहैड टैंक से पानी के लिए सप्लाई के लिए भूमिगत पाइपलाइन भी बिछायी गयी है जो काफी खराब किस्म की है जब भी टेस्टिंग के लिए ओवरहैड से पानी की सप्लाई शुरू करते ही पाइप फट जाती है और सड़क धंस जाती है जिसके चलते पानी की सप्लाई आज तक नहीं हो पायी।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के चलते जागी सीएम योगी सरकार
यूपी की सत्ता संभालने के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार बनारस के पेयजल योजना की समीक्षा कर रही थी लेकिन इस तरह की कार्रवाई का आदेश नहीं दिया गया था। पीएम नरेन्द्र मोदी का सभी के घरों तक पानी पहुंचाने के ड्रीम प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने का ऐलान किया है इसके बाद जाकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सख्ती बरतनी शुरू की। सीएम योगी की हनक दिखी तो शहर के लोगों को अब पीने के पानी के लिए तरसना नहीं पड़ेगा।
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