
Shankaracharya Avimukteshwaranand: अपनी 81 दिवसीय गौरक्षा यात्रा पूरी करने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाराणसी स्थित विद्या मठ में वापस लौट आए हैं। इस दौरान उन्होंने अपने मठ में बैठक की और शिक्षा, छात्र आंदोलन, गौरक्षा और यूपी सरकार की नीतियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों द्वारा किए गए आंदोलन को युवाओं की सबसे बड़ी जीत बताई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की। इसी के कारण सरकार के मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर से छात्रों का पेपर लीक को लेकर आंदोलन शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैलता गया। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के कारण ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दिया। छात्रों की इस जीत को लोकतांत्रिक आंदोलन की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा पूरे सिस्टम को बदलने की गारंटी नहीं है, लेकिन इससे सरकार की जवाबदेही जरूर तय होती है। सत्ता में बैठे लोगों को इस बात को समझना होगा कि ऐसे मामलों में उनकी जवाबदेही बनती है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी गौरक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कई तरह के लोगों से संवाद किया। सबसे अच्छी बात यह रही कि किसी ने गाय को पशु नहीं कहा, बल्कि सभी ने गाय को माता कहा। उन्होंने कहा है कि गाय को पशु की श्रेणी में रखना मूर्खता है। गाय हिंदुओं और देश के करोड़ों सनातनियों की माता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा जारी किए गए विज्ञापन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपने गौआश्रय केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज जारी करें। उन्होंने कहा कि सरकार अपने गौआश्रय केंद्रों को हाईटेक केंद्र में बदलने का दावा करती है। यदि ऐसा है तो पिछले 3 महीने का सीसीटीवी फुटेज सरकार को जारी करना चाहिए, तब लोग विश्वास करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि गौआश्रय केंद्रों में गौ माता की हालत बद से बदतर हो चुकी है।
शंकराचार्य ने दावा किया कि उनके इस यात्रा के दौरान आंदोलन से जुड़े लोगों के घरों पर सरकार ने पुलिस का पहरा लगा दिया था। लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोका जा रहा था। शंकराचार्य ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक और चिंताजनक बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गौ नीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। शंकराचार्य ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गौ संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो उसका परिणाम जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए।