वाराणसी

वाराणसी कोर्ट का फैसला: चोरी के आरोपी की पुलिस कस्टडी में हुई थी मौत, 29 साल बाद 2 रिटायर्ड दारोगा और डॉक्टर को मिली सजा

Varanasi court news: वाराणसी की अदालत ने पुलिस कस्टडी में हुई युवक की मौत के मामले में 29 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस मामले में रिटायर्ड हो चुके दो दारोगा समेत युवक के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को दोषी पाया है।
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Updated: 1 Jun 2026, 8:06 PM IST
Varanasi court news
वाराणसी कोर्ट परिसर, फाइल फोटो (Vijendra Mishra)

Varanasi court judgement: वाराणसी की अदालत ने पुलिस कस्टडी में हुई युवक की मौत के मामले में 29 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में रिटायर्ड हो चुके दो दारोगा समेत शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को दोषी पाया है। दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। इसके बाद यह चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला लंका थाना क्षेत्र के सुंदरपुर पुलिस चौकी का है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 29 साल पूर्व 1997 में केवल ₹100 चोरी हो जाने के शक में सुंदरपुर पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने एक युवक को हिरासत में लिया था। आरोप है कि पुलिस चौकी लाकर पूछताछ किए जाने के दौरान युवक की मौत हो गई। आरोपों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने पुलिस चौकी के अंदर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, जिसके कारण उसने पुलिस कस्टडी में ही दम तोड़ दिया था।

क्या था मामला

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, युवक की मौत हो जाने के बाद इस बात की सूचना उसके परिजनों को नहीं दी गई और चुपचाप रात में ही पोस्टमार्टम कराया गया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी शुरू की गई। परिजनों द्वारा आरोप लगाए जाने और सीबीआई जांच की मांग के बाद यह मामला शासन ने CBCID को सौंप दिया। सीबीसीआईडी इस मामले में जांच शुरू की और पाया कि पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने के कारण युवक की मौत हुई और इस मामले में सभी साक्ष्य को भी मिटाए जाने की कोशिश की गई।

वाराणसी की कोर्ट ने पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने युवक को लगे चोट को छिपाकर उसे आत्महत्या करार करने की कोशिश की, ताकि दोषी पुलिसकार्मियों को इस मामले में बचाया जा सके। आयोजन पक्ष के मुताबिक, 29 साल चले इस मामले में कुल 11 आरोपी बनाए गए थे और सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मौत हो चुकी है।

तीन आरोपी बरी

कोर्ट ने इस मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के के जैन को 5 साल जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, रिटायर्ड दारोगा नरेंद्र प्रताप को 10 वर्ष की कारावास और 31 हजार का जुर्माना लगाया गया है, जबकि रिटायर्ड दारोगा राधेश्याम सिंह को 6 महीने की सजा सुनाई गई है और 1000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने कहा है कि जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि पीड़ित परिवार को सौंपी जाएगी। वहीं, इस मामले में सह-आरोपी बनाए गए तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट और दो कांस्टेबल को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया है।

Updated on:
1 Jun 2026, 8:06 PM IST
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