
Varanasi news: वाराणसी की गंगा नदी में मछुआरों को मछली पकड़ने का दौरान, एक दुर्लभ शिवलिंग मिला है। दावा किया जा रहा है कि यह शिवलिंग करीब 2500 साल पुराना है और इसका इतिहास मौर्य कालीन सभ्यता से जुड़ा हुआ है। मछुआरों के जाल में फंसने के बाद शिवलिंग को गंगा नदी से बाहर निकाल कर घाट के ही पास स्थित गंगा मंदिर में स्थापित किया गया है।पुरातत्व विभाग को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है।
वाराणसी के सुजाबाद-डोमरी इलाके में गंगा नदी में मछुआरों को मछली पकड़ने के दौरान एक दुर्लभ शिवलिंग मिला है। इसके बाद मछुआरों ने घाट किनारे ही स्थित गंगा मंदिर में इसे स्थापित कर दिया। मंदिर के पुजारी लाल बाबू ने विधिवत पूजा अर्चन कर शिवलिंग को स्थापित किया है। बताया जा रहा है कि यह शिवलिंग 2500 साल पुराना है। वहीं, मामले की जानकारी होने के बाद पुरातत्व विभाग भी मौके पर पहुंच गया है और शिवलिंग की जांच में जुटा हुआ है।
मछुआरों ने बताया कि प्रतिदिन वे मछली पकड़ने के लिए गंगा नदी में जाल डालते हैं, लेकिन रविवार को जाल डालने के बाद जाल अत्यधिक भारी हो गया। मछुआरों ने बताया कि इस दौरान करीब डेढ़ दर्जन लोगों को जाल खींचने के लिए बुलाना पड़ा और करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद जाल को पानी से बाहर निकाला गया।
मछुआरों ने बताया कि इस दौरान उन्हें जाल में फंसा हुआ एक शिवलिंग मिला, जिसका वजन करीब 2 क्विंटल के आसपास है। इसके बाद विधिवत उसकी पूजा अर्चना की गई। वहीं, स्थानीय लोगों को शिवलिंग मिलने की जानकारी होने के बाद मौके पर पूजा पाठ करने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई।
विशेषज्ञों की मानें तो यह शिवलिंग मौर्यकालीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। वहीं, जिस पत्थर से शिवलिंग का निर्माण हुआ है, वह नेपाल के इलाकों में पाया जाता है, जिसका रंग काला होता है। वहीं, शिवलिंग को मंदिर में स्थापित किए जाने के बाद मंदिर के पुजारी ने पुरातत्व विभाग को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सोमवार को पुरातत्व विभाग की टीम मंदिर परिसर पहुंची और गंगा नदी से बरामद किए गए शिवलिंग की जांच में जुटी हुई है। फिलहाल, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो शिवलिंग काफी पुराना है। हालांकि, इसके बारे में पूरी जानकारी जांच होने के बाद ही पता चल पाएगी।