दुनियाभर में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सरकारों ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। फ्रांस इस फेहरिस्त में सबसे आगे निकल गया है, जहां राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर 'डिजिटल स्ट्राइक' के संकेत दिए हैं।
Social Media Addiction: फ्रांस भी उन देशों की कतार में शामिल हो गया है जो युवा पीढ़ी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस्तेमाल पर सख्ती कर चुके हैं या इसकी तैयारी में हैं। नए साल के संदेश में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ संकेत दिए कि सरकार अब बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया और स्क्रीन की बढ़ती लत से बचाने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
सरकार 19 जनवरी को एक ड्राफ्ट बिल संसद में लाने की तैयारी में है। दुनियाभर में कई देशों की सरकारों का मानना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए नाबालिगों को लत लगाने वाले कंटेंट की ओर धकेलते हैं। ऐसे में ‘डिजिटल कर्फ्यू’, उम्र आधारित प्रतिबंध और स्क्रीन टाइम नियंत्रण जैसी पहलें जरूरी हो गई हैं।
मेटा का दावा है कि वह उम्र सत्यापन मजबूत कर रहा है और किशोरों को संवेदनशील कंटेंट नहीं दिखाता। स्नेपचैट में टीन अकाउंट प्राइवेट होते हैं, चैट सिर्फ पहले से जुड़े दोस्तों से संभव है। टिकटॉक सहित अन्य प्लेटफॉर्म भी सेफ्टी टूल्स जोड़ रहे हैं, पर सरकारें मानती हैं कि यह पर्याप्त नहीं है।