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सेना के कब्जे के बावजूद बलूचिस्तान ने मनाया 78वां Independence Day, पाकिस्तान पर उठाए सवाल

Balochistan Independence Day: बलूचिस्तान ने 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाया, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे के खिलाफ विरोध की आवाज उठाई गई।

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Aug 11, 2025
बलूचिस्तान ने सोमवार को अपनी स्वतंत्रता की सालगिरह मनाई। (फोटो: IANS.)

Balochistan Independence Day: बलूचिस्तान ने सोमवार को अपनी ऐतिहासिक स्वतंत्रता की 78वीं सालगिरह (Balochistan Independence Day) मनाई, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे (Balochistan Pakistan Occupation) के खिलाफ एक अहम प्रतीक बन गई है। सन 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद बलूचिस्तान ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी, लेकिन 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया, जिसे अब तक बलूच राष्ट्रवादी लगातार चुनौती देते आ रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में स्वतंत्रता दिवस (Balochistan Independence Movement) के आयोजन को दबाने के लिए धारा 144 लागू कर दी थी, ताकि कोई विरोध न हो सके। बलूचिस्तान की 6 करोड़ की आबादी ने इस पाबंदी का विरोध करते हुए स्वतंत्रता दिवस मनाया और पाकिस्तान के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं (Baloch Human Rights) ने पाकिस्तान को युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्रता की मान्यता की अपील की।

मीर यार बलूच का पाकिस्तान पर आरोप

प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की सेना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना बिना किसी कानूनी अधिकार के बलूचिस्तान में तैनात है और इसने केवल बलूच लोगों की पहचान को मिटाने के लिए दमनकारी कदम उठाए हैं। मीर ने पाकिस्तान को आतंकवाद का 'वैश्विक गॉडफादर' करार दिया, यह कहते हुए कि पाकिस्तान उग्रवादियों को प्रशिक्षण देता है और युद्ध अपराधियों को शरण देता है।

विश्व समुदाय से अपील

मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की। उन्होंने पाकिस्तान को परमाणु ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को संरक्षण दिया और उसकी मदद से वैश्विक शांति को खतरा पैदा किया। मीर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।

बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की ऐतिहासिक लड़ाई

मीर ने बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई को याद करते हुए कहा, "हजारों सालों से हमारे पहाड़, रेगिस्तान और समुद्र बलूच लोगों के साहस की गवाही दे रहे हैं, जिन्होंने अपनी भूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया।" उन्होंने यह भी कहा कि बलूचिस्तान पर जब तक पाकिस्तान का कब्जा रहेगा, तब तक शांति और न्याय की कोई उम्मीद नहीं हो सकती। बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन और सेना द्वारा बलूच लोगों के अपहरण, यातना, और हत्या पर भी मीर ने चिंता जताई।

कब्जे के खिलाफ लड़ाई और भविष्य का संदेश

मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए अपना आह्वान जारी रखा और दुनिया से अपील की कि वे पाकिस्तान के कब्जे के खिलाफ बलूच लोगों के साथ खड़े हों। उन्होंने कहा, "भविष्य याद रखेगा कि कौन उत्पीड़ितों के साथ खड़ा था और कौन उत्पीड़कों के साथ। हमें न्याय और शांति का चुनाव करना होगा, और बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देनी होगी।"

बलूचिस्तान ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे को चुनौती दी

बहरहाल 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बलूचिस्तान ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे को चुनौती दी और अपनी स्वतंत्रता की मांग को और अधिक मजबूत किया। मीर यार बलूच और अन्य राष्ट्रवादी नेताओं ने दुनिया से अपील की कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए और पाकिस्तान की सरकार को उसके आतंकवाद, युद्ध अपराध और दमन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए।

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