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ताइवान पर कब्जा करने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहा चीन, डोनाल्ड ट्रंप के वापस लौटते ही कर दिया बड़ा खेल शुरू

China-Taiwan Conflict: चीन अब एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में अपनी गतिविधियां तेजी से बढ़ा रहा है। इसके लिए वह बड़ी संख्या में मछली पकड़ने वाली नावें, कोस्ट गार्ड जहाज और समुद्री सुरक्षा से जुड़े विशेष दल तैनात कर रहा है।

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May 16, 2026
फोटो में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सोर्स: ANI)

China-Taiwan Tension:राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका वापस लौटते ही चीन ने ताइवान को लेकर नया खेल शुरू कर दिया है। वह ताइवान पर कब्जा करने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहा है।

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और ताइवान न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में अपनी गतिविधियां तेजी से बढ़ा रहा है। इसके लिए वह बड़ी संख्या में मछली पकड़ने वाली नावें, कोस्ट गार्ड जहाज और समुद्री सुरक्षा से जुड़े विशेष दल तैनात कर रहा है। माना जा रहा है कि चीन बिना सीधे युद्ध के इन इलाकों पर अपना दबदबा मजबूत करना चाहता है। खासकर ताइवान के आसपास।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल ही में करीब 200 चीनी मछली पकड़ने वाली नावें येलो सी के अंदर तक पहुंच गईं। ये नावें उन समुद्री इलाकों के पास देखी गईं, जिन पर चीन और दक्षिण कोरिया दोनों दावा करते हैं। जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी इंजेनिस्पेस के डेटा के मुताबिक, महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स और विवादित समुद्री क्षेत्रों में चीनी जहाजों की गतिविधि काफी बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का क्या है कहना?

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अब अपनी ‘ग्रे-जोन’ रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। इसका मतलब है कि वह बिना खुली जंग छेड़े धीरे-धीरे समुद्री इलाकों में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है। इसके लिए चीन आम मछली पकड़ने वाली नावों का भी इस्तेमाल कर रहा है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर दूसरे कामों में लगाया जा सकता है।

इंजेनिस्पेस कंपनी के अधिकारी जेसन वांग के मुताबिक, चीन इन जहाजों के जरिए विवादित समुद्री इलाकों पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि तनाव बढ़ने की स्थिति में चीन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स को भी प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चीन सागर में एक समय पर 600 से ज्यादा चीनी मछली पकड़ने वाली नावें एक लाइन में देखी गईं। इसी दौरान चीन ने विवादित दियाओयुताई द्वीपों के आसपास अपने कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ा दी।

दक्षिण चीन सागर में भी चीन लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। स्कारबोरो शोल और पैरासेल द्वीपों के पास नई निर्माण गतिविधियां देखी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन बहुत सोच-समझकर ऐसे कदम उठा रहा है, ताकि बिना सीधे युद्ध के क्षेत्र में अपना प्रभाव मजबूत कर सके।

ताइवान मुद्दे पर हुई थी लंबी बातचीत

हाल ही में चीन दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ताइवान मुद्दे पर अहम बातचीत हुई थी। ट्रंप के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा था कि चीन ताइवान की आजादी की किसी भी कोशिश के खिलाफ है, क्योंकि इससे बड़ा संघर्ष हो सकता है।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है…

अमेरिका पहुंचते ही मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने बताया कि हमने ताइवान पर काफी बात की। शी जिनपिंग नहीं चाहते कि वहां आजादी की लड़ाई जैसी स्थिति बने, क्योंकि इससे गंभीर संघर्ष पैदा हो सकता है।”

बता दें चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में मानता है।

ताइवान को लेकर दोनों नेताओं के बीच इन मुद्दों पर भी हुई बात

ताइवान को लेकर दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई, साइबर सुरक्षा, ईरान और परमाणु हथियारों जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा की। ट्रंप ने इस बातचीत को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव कुछ कम हो सकता है।

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