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ईरान युद्ध का सबसे बड़ा खुलासा: हमले से पहले ही चीन ने लीक कर दी थी अमेरिकी सेना की खुफिया जानकारी!

Satellite Images: अमेरिका-इजरायल के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' से पहले ही चीनी AI कंपनी मिज़ारविज़न ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें ऑनलाइन लीक कर दीं। इन हाई-रेजोल्युशन तस्वीरें वायरल होने के बाद ईरान ने उन्हीं अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाया, जिससे दुनिया भर में हड़कंप मच गया है।

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Mar 10, 2026
चीन ने सेटेलाइट इमेजेज से अमेरिका के सीक्रेट लीक किए। (फोटो: Chinese AI Mizravision)

Artificial Intelligence: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे जंगी तनाव (Iran US Conflict) के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली घटना घटी है। युद्ध में पहली मिसाइल दागे जाने से बहुत पहले ही, चीन की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) कंपनी ने मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों और सैन्य ठिकानों की सटीक लोकेशन दुनिया के सामने उजागर कर दी थी। ध्यान रहे कि फरवरी के आखिरी हफ्ते में जैसे ही अमेरिका और इजराइल का संयुक्त 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) चर्चा में आया, इंटरनेट पर सैटेलाइट तस्वीरों का एक सेट (Satellite Images Leak) तेजी से वायरल होने लगा। इन तस्वीरों में अमेरिकी सेना की तैयारियों का ऐसी सीक्रेट था, जिसने सभी को हैरान कर दिया। खास बात यह थी कि इन सैन्य ठिकानों और हथियारों का पूरा ब्यौरा अंग्रेजी के बजाय मंदारिन (चीनी) भाषा में लिखा गया था।

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अमेरिकी एयरबेस और स्टील्थ फाइटर जेट्स का खुलासा (US Military Bases)

शंघाई स्थित 'मिज़ारविज़न' (MizarVision) : इस जियो-स्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी ने 20 फरवरी के आसपास ये हाई-रेजोल्युशन तस्वीरें जारी करना शुरू किया। इन सैटेलाइट तस्वीरों में कई अहम खुलासे हुए।

इजराइल का ओवडा एयर बेस: हमले से ठीक पहले यहां रनवे पर 11 लॉकहीड मार्टिन एफ-22 (F-22) स्टील्थ लड़ाकू विमानों की तैनाती देखी गई।

सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस: यहां 24 फरवरी को सात बोइंग ई-3 अवाक्स (AWACS) और दो बॉम्बार्डियर ई-11 संचार विमानों की हलचल कैद हुई।

कतर का अल-उदैद एयर बेस: 26 फरवरी की तस्वीरों में यहां केसी-135, सी-130 और कई अटैक हेलीकॉप्टर्स साफ नजर आए। इनके अलावा जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों की पूरी जानकारी भी चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे एक्स (X) और वीबो (Weibo) पर शेयर की गई।

समुद्र में एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर भी रखी गई नजर

चीनी कंपनी की नजर सिर्फ आसमान पर ही नहीं, बल्कि समुद्र में भी थी। ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और कमर्शियल सैटेलाइट की मदद से कंपनी ने अमेरिकी नौसेना के सबसे नए एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड' और अरब सागर में तैनात 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' की हर हलचल को ट्रैक किया। इन जहाजों के डेक पर मौजूद एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों तक की गिनती तस्वीरों में स्पष्ट थी।

आखिर कैसे काम करती है मिज़ारविज़न ? (MizarVision AI)

महज 200 कर्मचारियों वाली मिज़ारविज़न खुद कोई सैटेलाइट नहीं चलाती। इसे 'इंटेलिजेंस जगत का ब्लूमबर्ग' माना जाता है। यह कंपनी पब्लिक डोमेन में मौजूद डेटा, कमर्शियल सैटेलाइट (जैसे चीन के जिलिन-1 या पश्चिमी कंपनियों के सैटेलाइट) और शिप/फ्लाइट ट्रैकिंग सिग्नल्स को इकट्ठा करती है। फिर अपने AI मॉडल के जरिए यह स्वचालित रूप से सैन्य हथियारों और ठिकानों की सटीक पहचान कर लेती है।

क्या ईरान ने किया इस खुफिया डेटा का इस्तेमाल ? (Operation Epic Fury)

हालांकि इस बात का कोई सीधा और पुख्ता सुबूत नहीं है कि ईरान ने अपने जवाबी हमलों के लिए इन चीनी सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया। लेकिन यह एक बड़ा संयोग है कि मिज़ारविज़न ने जिन ठिकानों की जानकारी उजागर की थी, बाद में ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स ने उन्हीं जगहों पर कहर बरपाया।

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा

ईरान ने कतर के अल-उदैद हवाई अड्डे के साथ-साथ जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयर बेस को निशाना बनाया। जॉर्डन में हुए इस हमले में अमेरिका का 300 मिलियन डॉलर (करीब 2500 करोड़ रुपये) का AN/TPY-2 रडार सिस्टम तबाह हो गया। इस शक्तिशाली रडार नष्ट होने से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा।

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