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भूकंप से दहले म्यान्मार और तिब्बत: जानिए क्यों आ रहे हैं ये झटके और भारत में कहां है सबसे ज्यादा खतरा ?

Seismic Zone : म्यान्मार और तिब्बत में आए सिलसिलेवार भूकंप से लोगों में भारी दहशत है, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने जारी किए आंकड़े।

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Feb 25, 2026
म्यान्मार और तिब्बत में भूकंप। ( फोटो: ANI )

Tectonic Plates : म्यान्मार और तिब्बत के इलाकों में बुधवार को एक बार फिर धरती बहुत तेजी से कांप(Earthquake in Myanmar) उठी। इस क्षेत्र में चौथी बार भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत में 3.6 तीव्रता का भूकंप आया (Earthquake today), जिसका केंद्र धरती के 50 किलोमीटर नीचे था। वहीं, म्यान्मार में भी एक के बाद एक कई झटके महसूस किए गए। लगातार आ रहे इस भूकंप ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है कि आखिर इस क्षेत्र में धरती इतनी बार क्यों कांप रही है और भविष्य में इसका क्या असर हो सकता है। आइए समझते हैं भूकंप का कारण और आगे का खतरा।

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म्यान्मार में सुबह से कितनी बार आया भूकंप ? (NCS earthquake report)

म्यान्मार में बुधवार सुबह से ही धरती के नीचे भारी हलचल देखी जा रही है। NCS (seismo.gov.in) के रियल-टाइम डेटा के अनुसार, म्यान्मार में बुधवार को मुख्य रूप से दो बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं। पहला झटका रात 12:53 बजे आया, जिसकी तीव्रता 3.1 मापी गई। दूसरा और अपेक्षाकृत बड़ा झटका सुबह 08:46 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 थी। इससे पहले 3 फरवरी 2026 को भी म्यान्मार के मैगवे क्षेत्र में 6.0 तीव्रता का एक भयानक भूकंप आ चुका है, जिसके आफ्टरशॉक्स (झटके) भारत और बांग्लादेश तक महसूस किए गए थे।

आखिर क्यों आ रहा है ये भूकंप (Tectonic fault line)

वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, म्यान्मार, तिब्बत और नेपाल का पूरा इलाका एक प्रमुख 'जियोलॉजिकल फॉल्ट लाइन' (Geological Fault Line) पर स्थित है। इस क्षेत्र में विशालकाय 'इंडियन टेक्टोनिक प्लेट' लगातार उत्तर की ओर खिसक रही है और 'यूरेशियन प्लेट' से टकरा रही है। जब ये दो विशाल चट्टानी प्लेटें आपस में टकराती हैं या रगड़ खाती हैं, तो धरती के नीचे अत्यधिक ऊर्जा (Seismic Energy) पैदा होती है। जब यह रुकी हुई ऊर्जा अचानक बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो धरती तेजी से कांपने लगती है और सतह पर भूकंप आते हैं। इसी प्लेटों के टकराव के कारण ही हिमालय पर्वतों का निर्माण हुआ था और आज भी इनकी ऊंचाई बढ़ रही है।

और कहां-कहां आ सकता है भूकंप ? (Megathrust earthquake risk)

विभाग व विशेषज्ञों के अनुसार टेक्टोनिक प्लेटों की इस सक्रिय हलचल के कारण सीस्मोलॉजिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि हिमालय और इंडो-बर्मीज आर्क के आसपास के क्षेत्रों में आगे भी बड़े भूकंप का खतरा बना हुआ है। सबसे ज्यादा अलर्ट वाले इलाकों में शामिल हैं। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत (North East India): असम, मणिपुर, नगालैंड, और मिजोरम का पूरा क्षेत्र सिस्मिक जोन-V में आता है, जो सबसे ज्यादा संवेदनशील है। वहीं नेपाल और तिब्बत का इलाका दोनों प्लेटों के सीधे टकराव वाले क्षेत्र में है, इसलिए यहां भूकंप एक नियमित प्रक्रिया बन चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य, जो हिमालयी बेल्ट के बेहद करीब स्थित हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर

भूकंप की इन ताज़ा घटनाओं के बाद स्थानीय आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं। म्यान्मार और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में किसी भी संभावित नुकसान के आंकलन के लिए मॉनिटरिंग की जा रही है। भारत का पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय 'भूकंप ऐप' (BhooKamp App) और अपनी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए इन आफ्टरशॉक्स और नई हलचलों पर 24 घंटे नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी किया जा सके।

क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय संरचना पर भी असर पड़ रहा

लगातार आ रहे इन झटकों का एक दूसरा पहलू यह भी है कि इनका असर सिर्फ इमारतों या इंसानी जान-माल पर ही नहीं, बल्कि इस पूरे पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय संरचना पर भी पड़ रहा है। हिमालय और पूर्वोत्तर भारत के फॉल्ट लाइन्स में जमा हो रही सिस्मिक ऊर्जा लंबे समय में किसी बड़े 'मेगाथ्रस्ट' (Megathrust) भूकंप का भी संकेत हो सकती है।( इनपुट : ANI )

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