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पानी को हथियार बना रहा भारत, सिंधु जल संधि को लेकर फिर गिड़गिड़ाने लगा पाकिस्तान, कर दी एक और अपील

India-Pakistan में सिंधु जल संधि को लेकर तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाते हुए युद्ध जैसे हालात की चेतावनी दी।
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Jul 01, 2026
India-Pakistan
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार (IANS Photo)

India Pakistan Indus Waters Treaty: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस्लामाबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पानी को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भारत को चुनौती देते हुए कहा कि अगर भारत ने सिंधु नदी का पानी रोका या कम किया तो दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।

पाकिस्तान ने दी ‘युद्ध’ जैसी चेतावनी

पाकिस्तान ने कहा है कि अगर उसके हिस्से के पानी को रोकने या कम करने की कोशिश की गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकना क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति पहले ही कह चुकी है कि पानी में किसी भी तरह की कटौती को गंभीर कदम माना जाएगा।

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का बयान

सिंधु जल मामले में इशाक डार ने कहा कि पानी का इस्तेमाल कभी भी राजनीतिक हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नदियों का पानी देशों के बीच सहयोग और बातचीत का माध्यम होना चाहिए। पाकिस्तान का कहना है कि सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे जल बंटवारे का आधार रही है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है।

पाकिस्तान ने दुनिया से मांगा समर्थन

इशाक डार ने भारत के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि कोई भी देश एकतरफा तरीके से ऐसे समझौते को खत्म नहीं कर सकता। साझा जल संसाधनों का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लाभ के लिए, इन्हें सहयोग, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के आधार पर देशों के बीच एक सेतु के रूप में बने रहना चाहिए।

मुसादिक मलिक ने द्वितीय विश्व युद्ध की चेतावनी

पाकिस्तान के मंत्री मुसादिक मलिक ने सिंधु जल संधि को लेकर सबसे बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर यह समझौता कायम नहीं रहता तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने अंतरराष्ट्रीय नियमों पर सवाल उठेंगे। मलिक ने कहा, सिंधु जल संधि ने दो परमाणु शक्तियों के बीच तीन युद्ध देखे हैं। यदि यह संधि कायम नहीं रहती है, तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कागज पर बनी कोई भी विश्व व्यवस्था सुरक्षित नहीं रहेगी।

जानिए क्या है सिंधु जल संधि

सिंधु जल संधि पर साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत भारत को पूर्वी नदियों रावी, सतलुज और ब्यास पर अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मिला। यह समझौता 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी रहा था। लेकिन अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अपनी भागीदारी रोक दी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।

Updated on:
01 Jul 2026 06:25 pm
Published on:
01 Jul 2026 06:25 pm