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ईरान में उबाल: विरोध प्रदर्शन, ट्रंप की धमकी और भारत का चाबहार कनेक्शन

Iran Protests: ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिसमें अब तक 9 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और ट्रंप ने हस्तक्षेप करने की कड़ी धमकी दी है।

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Jan 03, 2026
ईरान में विरोध प्रदर्शन। (फोटो: X Handle/ @COLRICHARDKEMP)

Iran Protests: ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ (Iran Economic Crisis) बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन (Iran Protests) लगातार जारी हैं। दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए ये प्रदर्शन जनवरी 2026 में और तेज हो गए हैं। बढ़ती महंगाई, ईरानी रियाल की लगातार गिरती कीमत और बेरोजगारी से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए हैं। तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुई व्यापारिक हड़ताल जल्द ही क़ुम, मशहद, इस्फहान और यासुज समेत कई अन्य शहरों में फैल गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और कुछ स्थानों पर हिंसक झड़पें भी हुईं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 9 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल या हिरासत में हैं। ईरानी सरकार इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों के उकसावे में किया गया बता कर इन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।

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ट्रंप ने इसे ईरान की "परंपरा" बताया (US Iran Tension)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का इस्तेमाल करता है तो अमेरिका "तैयार" है। ट्रंप ने इसे ईरान की "परंपरा" करार देते हुए कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण लोगों की रक्षा करेगा। ईरान ने इस बयान को बेहद खतरनाक और उकसावे वाला बताया। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से तुरंत कार्रवाई की मांग की। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा कि ऐसी धमकियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका किसी भी संभावित नुकसान के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा। ईरान ने अपनी संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न सहने का साफ रुख दोहराया।

भारत का बड़ा हित चाबहार में जुड़ा

ईरान में चल रही इस अस्थिरता के बीच भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक हित चाबहार बंदरगाह से जुड़ा हुआ है। यह बंदरगाह भारत के लिए बहुत खास है क्योंकि इससे पाकिस्तान को पूरी तरह बायपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक व्यापार आसान और सस्ता हो जाता है। भारत ने 2024 में ईरान के साथ 10 साल का महत्वपूर्ण समझौता किया था, जिसमें शाहिद बेहेस्टी टर्मिनल का संचालन भारत को सौंपा गया ​था। भारत ने बंदरगाह के विकास, क्षमता विस्तार और रेल कनेक्शन के लिए करोड़ों रुपये का निवेश किया है।

तीसरे देश के फैसलों का शिकार न बनें: ईरानी राजदूत फथाली

ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फथाली ने हाल ही में भारतीय मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान और भारत मिल कर चाबहार प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक और मजबूत समाधान तलाश रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश चाहते हैं कि यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट किसी तीसरे देश के फैसलों या दबाव का शिकार न बने। राजदूत ने 2026 को भारत-ईरान संबंधों के लिए एक निर्णायक और महत्वपूर्ण साल बताया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनों के बावजूद सरकार संवाद और बातचीत के माध्यम से आर्थिक समस्याओं का समाधान कर रही है।

भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए

चाबहार सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का मुख्य हिस्सा है। इससे भारतीय सामान अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक तेज, सुरक्षित और कम खर्च में पहुंचते हैं। हाल के महीनों में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कुछ चुनौतियां आईं, लेकिन छह महीने की छूट मिलने से काम जारी है। भारत सरकार पूरे मामले पर सतर्कता से नजर रख रही है ताकि किसी भी तरह का बड़ा असर न पड़े।

भारत और ईरान के बीच संबंध मजबूत (Chabahar Port India)

बहरहाल, ईरान में जारी अस्थिरता से चाबहार जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट पर खतरा मंडरा सकता है, लेकिन भारत और ईरान के बीच संबंध मजबूत हैं। दोनों देश मिल कर काम कर रहे हैं कि यह महत्वपूर्ण बंदरगाह निर्धारित समय पर पूरी तरह विकसित हो सके। पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि ईरान की स्थिति कब और कैसे स्थिर होती है और भारत का यह महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट आगे कैसे बढ़ता है।

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