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ईरान ने हॉर्मुज के पास इजराइल के जासूसी ड्रोन को मार गिराया, अमेरिका से समझौते की अटकलों के बीच नया बवाल

Iran Israeli drone downed: ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट के पास इजराइली जासूसी ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिका के साथ शांति समझौते की अटकलों के बीच यह घटना बवाल बढ़ाने वाले है।

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May 24, 2026
ड्रोन के इस्तेमाल की गई सांकेतिक तस्वीर। (फोटो- AI)

अमेरिका से शांति के समझौतों की अटकलों के बीच ईरान की ईरान की सेना ने इजराइल का एक जासूसी ड्रोन मार गिराया है। यह घटना हरमोजगान प्रांत में हुई है। इससे हॉर्मुज स्ट्रेट में नया बवाल शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेहर न्यूज एजेंसी ने रविवार को यह दावा किया है। इस बीच, यह भी खबर सामने आई है कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के लिए एक ज्ञापन (एमओयू) जल्दी ही सामने आ सकता है।

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इजराइली ड्रोन को कैसे ध्वस्त किया?

ईरानी नौसेना की मदद से इजराइल के जासूसी ड्रोन का मलबा मिला है। यह इजराइली का 'ऑर्बिटर' ड्रोन था जो पूरी तरह टूट चुका था। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह ड्रोन जासूसी और निगरानी के लिए भेजा गया था। सेना ने इसे तुरंत गिरा दिया।

इस तरह की घटनाएं ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को दिखाती हैं। दोनों देश एक दूसरे को दुश्मन मानते हैं और अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं।

कौन सा ड्रोन था?

ऑर्बिटर ड्रोन इजराइल की कंपनी का बना हल्का जासूसी विमान है। यह छोटा होता है, आसानी से उड़ता है और दुश्मन इलाकों की तस्वीरें और जानकारी जुटाने में इस्तेमाल होता है। ईरान का दावा है कि उन्होंने ड्रोन को अपनी हवाई सीमा में घुसते ही पहचान लिया और कार्रवाई की।

ड्रोन घटना के बावजूद अच्छी खबर भी आ रही है। सूत्र बताते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर बातचीत तेज हो गई है। एमओयू पर जल्दी हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को कम करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह समझौता हुआ तो मध्य पूर्व में शांति की नई सुबह हो सकती है। हरमोजगान प्रांत सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

यह हॉर्मुज की खाड़ी के पास है जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है। ऐसे में किसी भी तरह की जासूसी गतिविधि पूरे इलाके को अस्थिर कर सकती है।

ईरान की सेना ने साफ कहा है कि वे अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। किसी भी देश को अपनी हवाई या समुद्री सीमा में घुसपैठ की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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