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ईरान के साथ जंग महंगी ! अमेरिकी हमलों से ट्रंप को लगा झटका, रूस पर क्यों लगाया गठजोड़ का इल्जाम

Iran War Trump: अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान युद्ध का आठवां दिन, ट्रंप ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की। रूस ईरान को अमेरिकी ठिकानों की जानकारी दे रहा है, जिससे ट्रंप को सैन्य नुकसान हो रहा है।

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Mar 07, 2026
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और ईरान के सैन्य अधिकारी। (सांकेतिक फोटो: AI)

Iran War Trump Russia 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में चल रहे ईरान युद्ध ( Iran War) के आठवें दिन शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भारी बमबारी की (US Strikes Iran), जिसे व्हाइट हाउस ने 'कत्ल की रात' करार दिया। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान और उसके आसपास के सैन्य ठिकानों पर 'बहुत कठोर' हमले किए गए, जिसमें दर्जनों ईरानी कमांडरों और वैज्ञानिकों की मौत हुई। लेकिन ट्रंप को इस जंग में बड़ा नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरानी जवाबी कार्रवाई (Trump Iran Conflict) से गल्फ क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों को नुकसान पहुंचा। ट्रंप ने इसे रूस की साजिश बताते हुए मॉस्को पर ईरान को अमेरिकी सेनाओं की खुफिया जानकारी (Russia Intelligence Sharing) देने का इल्जाम लगाया।

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हम उनके अगले नेता का चयन करेंगे : ट्रंप

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, रूसी खुफिया एजेंसियां ईरान को सैटेलाइट इमेजरी और अमेरिकी नौसेना व वायुसेना की लोकेशन शेयर कर रही हैं, जिससे ईरानी मिसाइलें अधिक सटीक हो गई हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "रूस का यह गठजोड़ युद्ध को लंबा खींच रहा है।" ट्रंप ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण के कोई सौदा नहीं होगा। हम उनके अगले नेता का चयन करेंगे।" लेकिन पेंटागन की एक गोपनीय रिपोर्ट से पता चला कि ईरान से अमेरिका को कोई तत्काल खतरा नहीं था, जो ट्रंप के दावों पर सवाल उठा रही है।

ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को निशाना बनाया

जानकारी के अनुसार युद्ध के दूसरे हफ्ते में ईरान ने 1,600 से अधिक ड्रोन हमले अमेरिकी सहयोगियों पर किए, जिससे इराक, सीरिया और लेबनान में अमेरिकी ठिकाने प्रभावित हुए। ट्रंप प्रशासन ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को निशाना बनाया, लेकिन ईरानी रिवॉल्युशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी विमानों को मार गिराया। उधर वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप के युद्ध के औचित्य बदलते जा रहे हैं , पहले न्यूक्लियर खतरा, अब रिजीम चेंज। उधर कांग्रेस में युद्ध घोषणा की बहस तेज हो गई है, क्योंकि 60-दिन की सीमा नजदीक आ रही है।

मॉस्को ने ट्रंप को चेतावनी दे दी

रूसी पक्ष से आरटी ने अमेरिकी-इजरायली हमलों को 'राजनीतिक हत्या' करार देते हुए कहा कि ईरान ने 'झुकने से इनकार' किया है, इसलिए हमला हुआ। मॉस्को ने ट्रंप को चेतावनी दी कि यह 'आक्रामकता' वैश्विक अस्थिरता लाएगी। बहरहाल ईरान संघर्ष से रूस को आर्थिक फायदा तो हो रहा, लेकिन अमेरिका की आक्रामकता से मॉस्को की वैश्विक साझेदारियां कमजोर पड़ रही हैं।

चीनी विदेश मंत्री ने इजरायल से हमले रोकने को कहा

ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी जमीनी आक्रमण को 'बड़ी तबाही' बताया। तेहरान ने कहा कि कोई आक्रमण 'निर्णायक जवाब' मिलेगा। अमेरिकी दूतावास दुबई में ईरानी हमले से नुकसान हुआ। इंटरनेशनल मीडिया ने रूस-चीन की निंदा का जिक्र किया, जहां चीनी विदेश मंत्री ने इजरायल से हमले रोकने को कहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दांव उल्टा पड़ रहा है। चैथम हाउस के विश्लेषक ने कहा, "ट्रंप बल प्रयोग को नई सामान्यता बना रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।"

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