
ईरान युद्ध में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने अमेरिकी सेना में तैनात ड्रोन के पूरे फ्लीट के करीब एक चौथाई हिस्से को तबाह कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ध्वस्त हो चुके हैं।
हर ड्रोन की कीमत 30 से 50 मिलियन डॉलर तक होती है। इस हिसाब से नुकसान डेढ़ अरब डॉलर से भी ज्यादा हुआ है। द वाशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से ये आंकड़े बताए हैं।
ये ड्रोन हॉर्मुज स्ट्रेट के आसपास निगरानी और हमलों के लिए इस्तेमाल हो रहे थे। धीमी रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने की वजह से यह ईरानी सेना और यमन-इराक में सक्रिय ग्रुप्स के लिए आसानी से निशाना बन गए।
कुछ ड्रोन गिराए गए तो कुछ का ऑपरेटर्स से संपर्क टूटने के बाद क्रैश हो गए। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। एयर फोर्स के पास 165 और मरीन कॉर्प्स के पास 20। खुफिया एजेंसियों वाले ड्रोन इसमें शामिल नहीं हैं।
मरीन कॉर्प्स के किसी ड्रोन का नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे ज्यादातर एशिया-पैसिफिक में तैनात हैं। मई में एयर फोर्स के एक सीनियर अफसर लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टेबर ने सीनेट को बताया कि बचे हुए ड्रोन की संख्या घटकर करीब 135 रह गई है।
इस बीच, खबर यह भी है कि पेंटागन पहले से ही रीपर को चरणबद्ध तरीके से बाहर कर रहा है। उसकी जगह सस्ते और झुंड में उड़ने वाले नए ड्रोन लाने की योजना है। ये नुकसान यूक्रेन को सालों से दी जा रही मदद और ईरान युद्ध के दबाव के बीच और भी भारी पड़ रहा है।
पहले महीने में ही अमेरिकी सेना ने 850 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें और 1000 से ज्यादा पैट्रियट व थाड इंटरसेप्टर दागे। कुछ हथियारों के भंडार कम होने से कमांडरों को रक्षा की रणनीति बदलनी पड़ी। वे कुछ इंटरसेप्टर उन खतरों के लिए बचाकर रख रहे हैं जो ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हालांकि, पेंटागन की ओर से कहा जा रहा है कि स्टॉक कम नहीं हुए हैं लेकिन ट्रंप प्रशासन संसद से 67 अरब डॉलर के अतिरिक्त पैकेज की मंजूरी मांग रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का अनुमान है कि सितंबर तक युद्ध का खर्च 37.5 अरब डॉलर हो जाएगा।