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हॉर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी को चीरकर घर वापस पहुंचा ईरानी सुपरटैंकर, इंडोनेशिया को पहुंचाया 20 लाख बैरल तेल

ईरान के एक विशाल तेल टैंकर ने इंडोनेशिया के रिआउ द्वीपों के पास समुद्र में दूसरे जहाज को कच्चा तेल ट्रांसफर किया। ईरान ने इसे अमेरिकी प्रतिबंधों को चकमा देने में बड़ी सफलता बताया।
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Apr 21, 2026
Strait of Hormuz
हॉर्मुज में जहाज। (फोटो- ANI)

मार्च 2026 के आखिरी दिनों में जब ईरान का एक विशाल तेल टैंकर खामोशी से खार्ग द्वीप का बंदरगाह छोड़कर हिंद महासागर की ओर बढ़ा, तो शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह जहाज इतिहास रचने जा रहा है।

अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी के बावजूद यह सुपरटैंकर इंडोनेशिया तक पहुंचा, वहां 20 लाख बैरल कच्चा तेल उतारा और सुरक्षित ईरान लौट आया। तेहरान इसे अमेरिकी घेरे को तोड़ने की जीत बता रहा है।

रिआउ द्वीपों तक का सफर

जहाज इंडोनेशिया के रिआउ द्वीप समूह पहुंचा जहां उसने एक अन्य विशाल टैंकर को अपना सारा कच्चा तेल दे दिया। इस तरह की 'समुद्र में माल की अदला-बदली' को ईरान अपने तेल कारोबार को जिंदा रखने के लिए पहले भी करता रहा है।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह जहाज अमेरिकी घेरे को पार करते हुए वापस आया।

जहाज ट्रैकिंग वेबसाइट टैंकर ट्रैफिक के मुताबिक यह नेशनल ईरानी वीएलसीसी (बेहद बड़ा कच्चे तेल का जहाज) कल तक खार्ग द्वीप पर वापस पहुंच जाएगा।

22 अप्रैल की समयसीमा और बढ़ता तनाव

यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच 22 अप्रैल की संघर्ष विराम समयसीमा बस कुछ घंटे दूर है। इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है लेकिन माहौल ठीक नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले ही इस युद्धविराम को 'नाजुक समझौता' बता चुके हैं।

उधर अमेरिकी नौसेना ने रविवार को ईरान के एक और मालवाहक जहाज 'तौस्का' को पकड़ लिया, वह अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रंप ने इसे अपनी जीत बताया जबकि ईरान ने इसे 'आपराधिक कार्रवाई' करार देते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर खतरे के बादल

ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है। इस दौरान खाड़ी से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी भी हुई। भारत ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए नई दिल्ली में ईरानी राजदूत को तलब किया।

हॉर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे जरूरी तेल रास्तों में से एक है। यहां से हर रोज लाखों बैरल तेल गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ेगा।

क्या बातचीत बचा पाएगी युद्ध को?

इस्लामाबाद में शांति वार्ता की उम्मीद अभी पूरी तरह टूटी नहीं है, लेकिन हालात बेहद पेचीदा हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण और अमेरिकी प्रतिबंध ये तीन मुद्दे ऐसे हैं जिन पर दोनों देश एक कदम भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते।

Updated on:
21 Apr 2026 12:28 pm
Published on:
21 Apr 2026 12:28 pm