दोनों देश अफ्रीका के खनिजों के लिए होड़ कर रहे हैं, लेकिन अफ्रीकी देशों को असली फायदा तभी होगा जब वे अपनी जमीन पर ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाएं। अभी तो ज्यादातर कच्चा माल बाहर जाता है। अमेरिका का कहना है कि उसका तरीका ज्यादा पारदर्शी और फेयर है, जबकि चीन की फंडिंग से देशों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है।