
Israel-Lebanon Ceasefire: लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों का सीजफायर हो गया है। इसी बीच लेबनान की संसद के सदस्य हुसैन हज हसन ने युद्धविराम को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल और लेबनान के बीच हुआ 10 दिन का युद्धविराम ईरान के दबाव का नतीजा है। उनका आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के दबाव के आगे झुक गए, जिसके चलते इजरायली नेतृत्व को यह समझौता स्वीकार करना पड़ा।
संसद में हसन ने कहा कि यह युद्धविराम ईरान के स्पष्ट दबाव के कारण लागू हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के दबाव के आगे झुकते हुए बेंजामिन नेतन्याहू को इस पर सहमत होने के लिए मजबूर किया।
इस दौरान उन्होंने युद्धविराम को लेकर भी चेतावनी दी। सांसद ने कहा कि देश को सतर्क रहना होगा। सांसद ने कहा कि हमारा दुश्मन भरोसेमंद नहीं है। उसने कई बार मौजूदा युद्धविराम का उल्लंघन किया है, इसलिए हमें लगातार सतर्क रहना चाहिए।
वहीं, हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने भी इस युद्धविराम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह इजरायल की सैन्य सीमाओं को दर्शाता है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार उन्होंने कहा कि लेबनान में हुआ युद्धविराम इजरायली कब्जे वाले शासन की कमजोरी को दिखाता है। लेबनान की इस्लामिक रेजिस्टेंस ने यह साबित कर दिया कि यह शासन अपने लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम नहीं है।
यह युद्धविराम इजरायल-लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जहां इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के बीच लगातार झड़पें हो रही थीं। यह तनाव क्षेत्र में अमेरिका-ईरान टकराव के बाद और बढ़ गया था।
इससे पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि इजरायल और लेबनान 10 दिन के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद दोनों देशों ने इस अस्थायी युद्धविराम को शांति की दिशा में एक कदम के रूप में स्वीकार किया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि मैंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बेहतरीन बातचीत की। दोनों नेताओं ने सहमति जताई है कि शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए शाम 5 बजे से 10 दिन का युद्धविराम लागू किया जाएगा।