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ईरान युद्ध में बुरी तरह फंसा पाक, सऊदी अरब या चीन किसका आदेश जरूरी? कौन क्या कह रहा?

चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक और सामरिक साझेदार है, जो नहीं चाहता कि इस्लामाबाद ईरान के खिलाफ कोई कदम उठाए। वहीं सऊदी अरब पाकिस्तान को ईरान के खिलाफ अपने साथ खड़ा होना चाहता है।

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Apr 04, 2026
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)

एक तरफ चीन है जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक और सामरिक साझेदार है। वह नहीं चाहता कि इस्लामाबाद ईरान के खिलाफ कोई कदम उठाए।

दूसरी तरफ सऊदी अरब है जो पाकिस्तान का दूसरा सबसे अहम दोस्त है। वह चाहता है कि पाकिस्तान ईरानी सरकार के खिलाफ उसके साथ खड़ा हो। पाकिस्तान इन दोनों के बीच इस तरह फंसा है कि न इधर जा सकता है न उधर।

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सऊदी अरब ने पाक को याद दिलाया पुराना समझौता

जब ईरान की मिसाइलों और ड्रोन ने सऊदी अरब पर हमला किया तो रियाद ने तुरंत इस्लामाबाद को फोन किया। दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक रक्षा समझौता है और सऊदी अरब ने उसी का हवाला देते हुए पाकिस्तान से मदद मांगी।

कुछ सऊदी विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते में परमाणु सुरक्षा की गारंटी भी शामिल है। यानी सऊदी अरब चाहता है कि पाकिस्तान उसके लिए ईरान के खिलाफ मैदान में उतरे।

चीन ने पाक से क्या कहा?

पाकिस्तान जैसे ही सऊदी की तरफ झुकने की सोचता है चीन का दबाव आ जाता है। बीजिंग नहीं चाहता कि ईरान में सरकार बदले क्योंकि ईरान चीन को 20 फीसदी तेल देता है और मध्य पूर्व में चीन की रणनीति का अहम हिस्सा है।

चीन ने पाकिस्तान को सीधे कह दिया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में शामिल न हो। और पाकिस्तान चीन को नाराज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा क्योंकि CPEC और अरबों डॉलर का कर्ज उसे बांधे हुए है।

पाक ने निकाला एक रास्ता

इस दोहरे दबाव से बचने के लिए पाकिस्तान ने एक रास्ता निकाला है। वह खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश इसी सोच का हिस्सा है।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ जानकार इसे महज एक चाल मानते हैं जिससे पाकिस्तान ईरान को उलझाए रखे और साथ में सऊदी का काम भी आगे बढ़ाता रहे।

पीओजीबी में हालात बेहद खराब, शिया आबादी पर जुल्म बढ़ा

इस पूरी कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा है पाकिस्तान के कब्जे वाला गिलगित बाल्टिस्तान। यह इलाका मुख्य रूप से शिया मुसलमानों का है और यहां के लोग ईरान के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक जब से यह संघर्ष शुरू हुआ है तब से पाकिस्तानी सरकार की तरफ से यहां के लोगों पर जुल्म तीन गुना बढ़ गया है। बच्चों तक को नहीं छोड़ा जा रहा। परिवार अब खुलकर पाकिस्तानी फौज के खिलाफ पुलिस में मुकदमे दर्ज करा रहे हैं।

भारत की जमीन पर पाकिस्तान का कब्जा और चीन की मौजूदगी

गिलगित बाल्टिस्तान को लेकर एक और अहम बात सामने आई है। यह इलाका संवैधानिक रूप से भारत का हिस्सा है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक प्रस्ताव पाकिस्तान से यहां से हटने की मांग करता है।

यही इलाका चीन और पाकिस्तान को जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी रास्ता है। रिपोर्ट कहती है कि न चीन और न पाकिस्तान उस जमीन के असली मालिक हैं जिस पर उनकी पूरी रणनीति टिकी है।

पाकिस्तान की साख को लग रही है चोट

दुनिया के सामने पाकिस्तान की यह दोहरी चाल अब छुपी नहीं है। एक तरफ चीन को खुश करना दूसरी तरफ सऊदी को मनाना और ऊपर से शांतिदूत बनने का दिखावा।

इस खेल ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। रिपोर्ट साफ चेतावनी देती है कि अगर पाकिस्तान ने अपनी इस उलझी हुई नीति को नहीं सुलझाया तो देश के भीतर टूटन और भी गहरी होती जाएगी।

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