4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ईरान युद्ध में अब आएगा असली मोड़! अमेरिका को घेरने के लिए चीन पीछे से कर रहा बड़ा ‘गेम’, ट्रंप को भनक तक नहीं

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग छिड़ी हुई है, लेकिन चीन बड़े आराम से इस उथलपुथल का फायदा उठा रहा है।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Apr 04, 2026

China condemns US,Donald Trump,Nicolas Maduro arrest,China US relations,US military operation,

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो- IANS)

जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ी हुई है और इजराइल भी मोर्चे पर डटा है तब बीजिंग में बैठे चीनी नेता बड़े आराम से यह सब देख रहे हैं। चीन इस पूरी उथलपुथल का फायदा उठाकर मिडिल ईस्ट में अपनी जड़ें जमा रहा है।

एक ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि चीन ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट में पीछे से बड़ा गेम कर रहा है। दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका-इजराइल को इस बात की भनक तक नहीं है।

चीन की वह रणनीति जो अमेरिका को परेशान कर रही है

चीन ने एक नई रणनीति अपनाई है जिसे रिपोर्ट में 'घेरे को घेरना' बताया गया है। अमेरिका ने दुनिया भर में 800 सैन्य अड्डे बना रखे हैं और इनके जरिए वह चीन को घेरने की कोशिश करता है।

चीन ने इसका जवाब सीधी लड़ाई से नहीं बल्कि अपने तरीके से दिया है। वह धीरे धीरे बंदरगाह खरीद रहा है, बुनियादी ढांचा बना रहा है और रणनीतिक जगहों पर अपने सैन्य अड्डे स्थापित कर रहा है। जिबूती और कंबोडिया में उसके अड्डे इसी सोच का नतीजा हैं।

ईरान को क्यों बचा रहा है चीन?

ईरान और चीन के बीच 25 साल का रणनीतिक समझौता है। लेकिन चीन ईरान का साथ सिर्फ दोस्ती की वजह से नहीं दे रहा। ईरान चीन को अपनी कुल जरूरत का 20 फीसदी तेल देता है।

अगर ईरान अमेरिकी दबाव में झुक गया तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा खतरा होगा। इसलिए चीन ईरान को आर्थिक और सैन्य मदद देकर उसे अमेरिका के सामने टिकाए रखना चाहता है। इससे एक तरफ अमेरिका मध्य पूर्व में उलझा रहता है और दूसरी तरफ चीन का काम आसान होता जाता है।

अमेरिका को मध्य पूर्व में थकाना है चीन का मकसद

रिपोर्ट में एक बहुत अहम बात कही गई है। चीन चाहता है कि अमेरिका मध्य पूर्व के दलदल में जितना ज्यादा धंसे उतना अच्छा। जब अमेरिका का ध्यान, पैसा और फौज मध्य पूर्व में लगी होगी तो वह एशिया प्रशांत क्षेत्र पर उतना ध्यान नहीं दे पाएगा। और यही वह इलाका है जहां चीन ताइवान पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है और हिंद महासागर में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है।

चीन के हथियार जो दिखते नहीं

चीन की ताकत सिर्फ फौज में नहीं है। वह बेल्ट एंड रोड परियोजना के जरिए दर्जनों देशों को अपने आर्थिक दायरे में ला चुका है। शंघाई सहयोग संगठन और BRICS जैसे मंचों पर वह ईरान जैसे देशों को राजनीतिक ताकत देता है। इस तरह बिना एक भी गोली चलाए चीन उन देशों को अपने पाले में खींच लेता है जो अमेरिका से नाराज हैं।

खाड़ी के अमेरिकी अड्डों पर चीन की पैनी नजर

चीन लंबे समय से खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर नजर रखता आया है। जब से इन अड्डों पर हमले हुए हैं और अमेरिकी विमान मार गिराए गए हैं तब से बीजिंग को लग रहा है कि इन अड्डों की ताकत पहले जितनी नहीं रही।

यही मौका देखकर चीन खुद को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। वह खाड़ी के देशों को यह बताने की कोशिश में है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है और चीन एक बेहतर साझेदार हो सकता है।

भारत के लिए यह सब क्यों मायने रखता है

यह पूरा खेल भारत के लिए भी बेहद अहम है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी, मध्य पूर्व में उसका बढ़ता असर और ईरान के साथ उसकी गहरी दोस्ती, यह सब मिलकर भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनते हैं।

भारत की ऊर्जा जरूरतें, व्यापार मार्ग और सामरिक हित सभी इस इलाके से जुड़े हैं। अगर चीन यहां मजबूत हो गया तो भारत के लिए समीकरण और मुश्किल हो जाएंगे।