
Russia-Ukraine War Update: मिडिल-ईस्ट में एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ी हुई है। ईरान ने बाकी के खाड़ी देशों में स्थिति अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। जिसका मुहतोड़ जवाब अमेरिका भी दे रहा है। दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच भी तनाव बढ़ गया है। हाल ही में यूक्रेन ने रूस पर ब्लैक-सी में सिविलियन कार्गो जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि इससे अनाज का निर्यात रुक रहा है और दुनिया के कई देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है।यही कारण है कि यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कहा कि रूस जानबूझकर ब्लैक-सी में सिविलियन जहाजों को निशाना बना रहा है। उनके मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में कम से कम तीन कार्गो जहाजों पर हमले हुए हैं। इन हमलों में कई क्रू मेंबर मारे गए और कई घायल हुए।
इस बीच सिबिहा ने दावा किया कि हमलों के कारण पीक हार्वेस्ट सीजन के दौरान यूक्रेन के ब्लैक सी मैरीटाइम कॉरिडोर से एक भी जहाज नहीं गुजर सका। उन्होंने इसे आर्थिक और मानवीय आतंक करार दिया। उनका कहना है कि रूस वैश्विक खाद्य आपूर्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा आपूर्ति (तेल-गैस) को प्रभावित करने की कोशिश की थी, उसी तरह रूस अब ब्लैक सी के जरिए दुनिया के फूड मार्केट पर दबाव बना रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन ने इस मुद्दे पर 27 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। सिबिहा ने सभी देशों से अपील की कि वे रूस पर ब्लैक-सी में नेविगेशन की आजादी बहाल करने के लिए दबाव डालें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति जारी रही तो अफ्रीका, एशिया, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका के कई देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है। इन क्षेत्रों के करोड़ों लोग यूक्रेन के अनाज पर निर्भर हैं। ऐसे में निर्यात रुकने से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और कई गरीब देशों में भुखमरी का खतरा पैदा हो सकता है।
उनका ये भी कहना था कि किसी भी देश को दुनिया की खाद्य सुरक्षा को हथियार बनाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की।
बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच डेनमार्क की प्रमुख शिपिंग कंपनी ‘Maersk’ ने ‘Chornomorsk Fishing Port’ के जरिए यूक्रेन के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं। अब इस मार्ग का कार्गो रोमानिया के कॉन्स्टेंटा पोर्ट के जरिए भेजा जाएगा।
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसके ड्रोन ने उन जहाजों को निशाना बनाया जो यूक्रेनी सेना के लिए सैन्य सामग्री ले जा रहे थे। वहीं यूक्रेन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि निशाना बनाए गए जहाजों में एक सिविलियन बल्क कैरियर 'गोल्डन रोज' भी शामिल था।
यूक्रेन की स्टेट बॉर्डर गार्ड सर्विस के मुताबिक, ड्रोन हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी। इसके बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी 16 क्रू मेंबरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें मिस्र और सीरिया के नागरिक शामिल थे।
बता दें इससे पहले हुए एक अन्य समुद्री हमले में ‘MV Golden Leo’ जहाज पर चार भारतीय नागरिकों की मौत की खबरें भी सामने आई थी। ऐसे में ब्लैक सी का बढ़ता तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और खाद्य सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।