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ट्रंप की धमकी और नई डेडलाइन के बाद धड़ाम से गिरी साऊथ कोरिया की करेंसी, भारत पर क्या होगा असर?

दक्षिण कोरिया की मुद्रा वॉन सोमवार को 1,510 प्रति डॉलर पर खुली और 1,506.3 पर बंद हुई। अमेरिका-ईरान के 45 दिन के संघर्षविराम की खबर से थोड़ी रिकवरी आई, लेकिन मध्य पूर्व युद्ध के कारण तेल महंगा होने से वॉन लगातार कमजोर है और 1,500 के नीचे बना हुआ है।
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Apr 06, 2026
US President Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- IANS)

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस वक्त इतना बढ़ गया है कि पूरी दुनिया के बाजार हिल गए हैं। कच्चे तेल का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। और इसका असर सिर्फ ईरान या अमेरिका तक नहीं रहा, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण कोरिया की करेंसी भी इस आग की चपेट में आ गई।

ट्रंप की धमकी और एक नई डेडलाइन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को साफ कह दिया कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला तो उसे 'नरक जैसे हालात' झेलने होंगे। उन्होंने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे तक का वक्त दिया है।

यह डेडलाइन एक दिन पहले वाली डेडलाइन से बढ़ाई गई है। होर्मुज वो रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपना तेल मंगाता है। यह बंद हुआ तो तेल की किल्लत और उसके बाद महंगाई का जो तूफान आएगा, उसे रोकना किसी के बस की बात नहीं होगी।

कोरियाई वॉन क्यों टूटा

दक्षिण कोरिया की करेंसी वॉन सोमवार को 1,510 प्रति डॉलर पर खुली और बंद हुई 1,506.3 पर। यानी गिरावट तो थी लेकिन दिन के दौरान थोड़ी रिकवरी भी आई।

वो रिकवरी इसलिए आई क्योंकि खबर रही कि अमेरिका और ईरान के बीच 45 दिन के संघर्षविराम की बातचीत चल रही है। इस खबर से बाजार को थोड़ी राहत मिली।

लेकिन असली दिक्कत यह है कि दक्षिण कोरिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। जब तेल महंगा होता है तो उसे डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।

इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और वॉन कमजोर पड़ता है। फरवरी के आखिर में जब से मध्य पूर्व में जंग शुरू हुई है, तब से वॉन 1,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

केबी कुकमिन बैंक की अर्थशास्त्री मून जेओंग-ही का कहना है कि भले ही अमेरिका और ईरान डील कर लें, साल के पहले छह महीनों में तेल के दाम ऊंचे ही रहेंगे। और जब तक तेल महंगा है, वॉन 1,500 के आसपास ही डोलता रहेगा।

एक दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे तनाव के बावजूद दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार KOSPI सोमवार को 1.36 फीसदी चढ़कर 5,450 के ऊपर बंद हुआ। संस्थागत निवेशकों की जोरदार खरीदारी ने बाजार को संभाले रखा।

बड़ा सवाल क्या है?

दुनिया की नजर अभी मंगलवार रात पर टिकी है। ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने पर ईरान क्या करता है, यह तय करेगा कि आने वाले हफ्तों में तेल के दाम किस दिशा में जाते हैं। और तेल की दिशा तय करेगी कि एशिया के बाजारों का मूड कैसा रहेगा।

साऊथ कोरिया की करेंसी गिरने से भारत पर क्या पड़ेगा असर?

साऊथ कोरिया कोई छोटा देश नहीं है। सैमसंग, LG, Hyundai, Kia जैसी कंपनियां वहीं से हैं। भारत में इन कंपनियों का बहुत बड़ा कारोबार है। लाखों भारतीय इन ब्रांड्स के फोन, टीवी, फ्रिज और गाड़ियां इस्तेमाल करते हैं।

जब कोरियाई करेंसी वॉन गिरता है तो कोरियाई कंपनियों का सामान बाकी दुनिया के मुकाबले सस्ता हो जाता है। यानी सैमसंग या LG का प्रोडक्ट भारत में और सस्ते में आ सकता है।

पहली नजर में यह अच्छी खबर लगती है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि भारतीय कंपनियां जो इन्हीं सेक्टर में काम करती हैं, उन पर दबाव बढ़ जाता है। देसी इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो कंपनियों को कोरियाई प्रतिस्पर्धा से और कड़ी टक्कर मिलने लगती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, साऊथ कोरिया की करेंसी गिरने से भारत को तुरंत कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा। लेकिन यह एक संकेत जरूर है कि दुनिया में इस वक्त जो चल रहा है वो सिर्फ दूर का तमाशा नहीं है। होर्मुज का तनाव, तेल की महंगाई और एशियाई करेंसियों की कमजोरी, ये सब मिलकर भारत की जेब पर असर डाल सकते हैं।

Updated on:
06 Apr 2026 03:54 pm
Published on:
06 Apr 2026 03:54 pm
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