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अब दिन का इंतजार नहीं, जहां जरूरत वहां मिलेगी सूरज की रोशनी, अमेरिका की स्टार्टअप कंपनी लॉन्च करेगी सेटेलाइट

अमेरिका की स्टार्टअप Reflect Orbital अंतरिक्ष में विशाल दर्पण वाला सैटेलाइट 'Arendelle-1' लॉन्च करने जा रही है, जो रात में भी सूरज की रोशनी धरती पर भेजेगा। पढ़ें पूरी खबर...
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Jul 13, 2026
Space Sunlight Satellite
डेमो सैटेलाइट 'एरेंडिल-1' (प्रतीकात्मक तस्वीर AI)

क्या होगा अगर सूरज डूबने के बाद भी आसमान से धूप मिलती रहे? यह सवाल अब केवल विज्ञान की कहानियों का हिस्सा नहीं रहा। बल्कि विज्ञान इस पर प्रयोग भी कर रहा है। हाल ही में अमरीका ने एक ऐसी अंतरिक्ष परियोजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत विशाल दर्पण वाला सैटेलाइट अंतरिक्ष से सूरज की रोशनी को धरती पर भेजेगा। इससे रात और दिन का फर्क भी कम हो जाएगा। अगर वैज्ञानिक इस प्रयोग में सफल होते है, तो रात में भी सोलर फार्म बिजली बना सकेंगे, आपदा प्रभावित इलाकों में रोशनी पहुंचाई जा सकेगी और कई काम बिना कृत्रिम रोशनी के किए जा सकेंगे।

'एरेंडिल-1' साल के अंत तक होगा लांच

अमरीकी संचार नियामक (एफसीसी) ने कैलिफोर्निया की स्टार्टअप कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को अपने पहले डेमो सैटेलाइट 'एरेंडिल-1' को इस साल के अंत तक लॉन्च करने की अनुमति दे दी है। कंपनी के अनुसार, यह योजना सिर्फ एक सैटेलाइट तक सीमित नहीं है। उसका लक्ष्य 2028 तक करीब 1,000 बड़े दर्पण वाले सैटेलाइट और 2035 तक लगभग 50,000 सैटेलाइट का नेटवर्क तैयार करना है। यह दर्पण करीब 55 मीटर (180 फीट) चौड़े हो सकते हैं और उनकी रोशनी लगभग 100 पूर्णिमा के चांद जितनी चमकदार हो सकती है।

धरती पर 5 किलो मीटर में फैलेगा प्रकाश

यह सैटेलाइट लो-अर्थ ऑर्बिट यानी धरती से करीब 640 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करेगा। अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद इसमें लगभग 18 मीटर (करीब 60 फीट) चौड़ा चौकोर दर्पण खुल जाएगा। यह दर्पण सूरज की रोशनी को परावर्तित करके धरती पर करीब 5 किलोमीटर चौड़े इलाके तक पहुंचाएगा।

नया प्रयोग अंतरिक्ष अध्ययन में चुनौती भी

हालांकि इस परियोजना को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। अमरीकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी को डर है कि अंतरिक्ष में लगे ये विशाल दर्पण रात के आसमान को जरूरत से ज्यादा चमका देंगे, जिससे अंतरिक्ष का अध्ययन करना मुश्किल हो जाएगा। खगोल विज्ञान के लिए प्राकृतिक अंधेरा बहुत जरूरी होता है। साथ ही, यह प्राकृतिक जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है।

चिंताओं के बावजूद मंजूरी पर आयोग का तर्क

तमाम चिंताओं के बावजूद एफसीसी ने परियोजना को मंजूरी दी है। आयोग ने तर्क दिया कि उसकी जिम्मेदारी केवल सैटेलाइट संचार और रेडियो फ्रीक्वेंसी का नियमन करना है। अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करना नहीं। इससे पहले रूस ने 1993 में इसी तरह के दर्पण का अंतरिक्ष में प्रयोग कर साइबेरिया के कुछ हिस्सों में रोशनी पहुंचाई थी।

Updated on:
13 Jul 2026 06:50 am
Published on:
13 Jul 2026 06:50 am