मामला तब शुरू हुआ जब मिसेज बी को कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट सर्जरी के बाद जटिलताएं आईं। अस्पताल ने उन्हें पेलिएटिव केयर के साथ डिस्चार्ज कर दिया, जहां उनके पति (जो खुद बुजुर्ग थे) प्राइमरी केयरगिवर बने।
कनाडा में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (MAiD) प्रोग्राम के तहत एक 80 वर्षीय महिला 'मिसेज बी' की इच्छामृत्यु का मामला विवादों में घिर गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पति के केयरगिवर बर्नआउट (देखभाल करने की थकान) के कारण उन्होंने पत्नी को मौत की ओर धकेल दिया, भले ही महिला ने अंत में अपनी मांग वापस ले ली थी। ऑन्टारियो MAiD डेथ रिव्यू कमिटी की रिपोर्ट में इस मामले को गंभीर खामी बताते हुए कहा गया है कि प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी थी, जिससे संभावित जबरदस्ती या प्रभाव का खतरा बढ़ गया।
मामला तब शुरू हुआ जब मिसेज बी को कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट सर्जरी के बाद जटिलताएं आईं। अस्पताल ने उन्हें पेलिएटिव केयर के साथ डिस्चार्ज कर दिया, जहां उनके पति (जो खुद बुजुर्ग थे) प्राइमरी केयरगिवर बने। देखभाल की भारी जिम्मेदारी से पति बर्नआउट का शिकार हो गए। शुरू में मिसेज बी ने MAiD के तहत इच्छामृत्यु का विकल्प चुना, जिसके बाद पति ने रेफरल सर्विस से संपर्क किया।
लेकिन असेसमेंट के दौरान महिला ने अपनी मांग वापस ले ली। उन्होंने व्यक्तिगत और धार्मिक मूल्यों का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा कि वे इच्छामृत्यु नहीं चाहतीं। अगले दिन अस्पताल में पेलिएटिव केयर डॉक्टर ने पति के बर्नआउट को नोट किया और इनपेशेंट हॉस्पिस केयर के लिए आवेदन किया, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बावजूद पति ने तुरंत दूसरा असेसमेंट मांगा। दूसरे असेसर ने महिला को योग्य ठहराया, जबकि पहला असेसर ने विरोध किया और कहा कि कोई इमरजेंसी नहीं है, साथ ही केयरगिवर के बर्नआउट से कोएर्शन या अनुचित प्रभाव की आशंका जताई। फिर भी तीसरे असेसर ने मंजूरी दे दी और प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक कर दिया गया। MAiD प्रदाता ने दावा किया कि क्लिनिकल परिस्थितियां इमरजेंट थीं। अंततः महिला की इच्छामृत्यु कर दी गई।
ऑन्टारियो MAiD डेथ रिव्यू कमिटी ने रिपोर्ट में चिंता जताई कि मिसेज बी की सामाजिक और अंतिम जीवन परिस्थितियों तथा देखभाल की जरूरतों के सभी पहलुओं की ठीक से जांच नहीं हुई। कमिटी ने कहा कि केयरगिवर के बर्नआउट से बाहरी कोएर्शन की संभावना थी। एक्सपर्ट्स को संदेह है कि क्या महिला ने कभी वाकई इच्छामृत्यु मांगा था या पति मुख्य पहलकर्ता थे। रिपोर्ट में कहा गया कि पति ने प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाया, जबकि महिला असेसमेंट के दौरान मौजूद थीं, जिससे उन्हें दबाव महसूस हुआ हो सकता है।