
रूस ने युद्ध शुरू करके यूक्रेन को कंगाल बना दिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
सिर्फ 2022 के बाद से ही देश का सार्वजनिक कर्ज 110 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ गया है। अब कुल कर्ज 208.97 अरब डॉलर पहुंच चुका है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब हर यूक्रेनी नागरिक पर कर्ज का बोझ करीब 7,500 डॉलर हो गया है। ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं, खासकर तब जब पश्चिमी देशों से मिल रही मदद के बावजूद हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे।
यूक्रेन के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 की शुरुआत में देश का कुल कर्ज 97.96 अरब डॉलर था। अब ये बढ़कर 208.97 अरब डॉलर हो गया है। यानी करीब 111 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बाहरी कर्ज में हुई है।
ये 57.2 अरब डॉलर से बढ़कर 162.73 अरब डॉलर पहुंच गया है। इसमें करीब 10 अरब डॉलर अकेले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को चुकाना है। बाकी कर्ज सहयोगी देशों से लिया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद मिली सैन्य मदद और अनुदान के बावजूद यूक्रेन को लगातार नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं।
यूक्रेन की आबादी करीब 2.8 करोड़ बताई जा रही है। ऐसे में हर व्यक्ति पर औसतन 7,500 डॉलर का सार्वजनिक कर्ज है। ये बोझ सिर्फ सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और आम जनजीवन को भी प्रभावित कर रहा है।
वर्खोव्ना राडा (यूक्रेन की संसद) के सदस्यों का अनुमान है कि सिर्फ मौजूदा कर्ज चुकाने में ही 35 साल लग सकते हैं। इतने लंबे समय तक कर्ज के बोझ तले जीना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती है।
यूक्रेन अभी भी अपने पश्चिमी सहयोगियों पर भरोसा कर रहा है। हाल ही में यूरोपीय संघ ने 90 अरब यूरो के नए ऋण पैकेज की घोषणा की है।
इसकी पहली किस्त ड्रोन बनाने के लिए दी जाएगी। अमेरिका, यूरोपीय देश और अन्य सहयोगी लगातार सैन्य और आर्थिक मदद भेज रहे हैं, लेकिन कर्ज भी उसी तेजी से बढ़ रहा है।
इस बीच, फ्रांस के एवियन में होने वाले G7 समिट में यूक्रेन मुद्दा अहम रहेगा। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी इसमें शामिल होंगे। समिट के पहले दिन यूक्रेन पर खास सत्र होगा।
इसके अलावा मध्य पूर्व देशों- मिस्र, कतर, यूएई और सऊदी अरब के साथ भी चर्चा होगी। समिट में यूक्रेन संघर्ष के अलावा ईरान-इजराइल, गाजा, लेबनान और हॉर्मुज स्ट्रेट की तनावपूर्ण स्थिति पर भी फोकस रहेगा।