अमेरिका ने क्यूबा के ऊपर MQ-4C ड्रोन तैनात कर चीन की तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति तेज कर दी है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा राजनीति में नए तनाव का संकेत है।
US vs China:अमेरिका ने क्यूबा के ऊपर MQ-4C ट्राइटन ड्रोन तैनात कर निगरानी बढ़ा दी है, जिसे चीन की तेल आपूर्ति पर रणनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है। यह हाई-टेक ड्रोन लंबे समय तक ऊंचाई पर उड़कर समुद्री मार्गों पर नजर रख सकता है। इससे पहले अमेरिका वेनेजुएला, होर्मुज और मलक्का मार्गों के जरिए भी चीन की ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित करने की कोशिश कर चुका है। अब क्यूबा चौथा अहम मोर्चा बनता दिख रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा राजनीति में तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी नौसेना का MQ-4C ट्राइटन एक हाई-टेक सर्विलांस ड्रोन है, जिसकी कीमत लगभग 240 मिलियन डॉलर बताई जाती है। यह ड्रोन 24 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है और 55,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भरता है। हाल ही में यह ड्रोन क्यूबा के उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी तटों के पास सक्रिय देखा गया। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस डेटा के अनुसार, इस ड्रोन को हवाना के पास देखा गया था। ड्रोन से कई समुद्री मार्गों की निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल निगरानी नहीं बल्कि चीन को एक स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका उसके समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
अमेरिका पहले ही तीन बड़े कदम उठा चुका है। पहला, वेनेजुएला के तेल भंडार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना। दूसरा, ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति को प्रभावित करना। तीसरा, मलक्का जलडमरूमध्य में निगरानी बढ़ाना, जहां से चीन की लगभग 80% समुद्री तेल आपूर्ति गुजरती है। इन तीनों रणनीतियों के चलते चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है। हालांकि चीन ने रूस और अन्य देशों से आयात बढ़ाकर संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान है।
अब क्यूबा इस रणनीतिक खेल का चौथा अहम केंद्र बन गया है। कैरिबियन क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर नियंत्रण से अमेरिका न केवल चीन की गतिविधियों को सीमित कर सकता है बल्कि अपने दक्षिणी तट, खासकर फ्लोरिडा की सुरक्षा भी मजबूत कर सकता है। इसके अलावा क्यूबा में मौजूद चीनी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी केंद्र भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्रोन ने बेजुकाल इलाके के आसपास भी निगरानी की, जहां चीन की इंटेलिजेंस गतिविधियां होने की आशंका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी इस दिशा में इशारा करता है। उन्होंने कहा था, "मैं इसके साथ कुछ भी कर सकता हूं," जो क्यूबा पर अमेरिका की संभावित रणनीतिक पकड़ को दर्शाता है।