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यूरेनियम सौंपने को तैयार है ईरान? दूसरे दौर की वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने किया बड़ा दावा

US Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात अभी भी कुछ ठीक नहीं हैं और बातचीत जारी है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा दावा सामने आया है, जिसके अनुसार ईरान यूरेनिम लौटाने को राजी हो गया है।

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भारत

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Harshita Saini

Apr 17, 2026

Iran US Ceasefire, Trump Nuclear Statement, Iran Enriched Uranium, US Airstrikes Iran Nuclear Sites, Iran Nuclear Tension

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा (सोर्स-IANS)

US Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी तनाव भरी परिस्थितियां बनी हुई हैं। दो हफ्ते का सीजफायर खत्म होने की कगार पर है, लेकिन अभी तक कोई डील नहीं हुई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा दावा सामने आया है। ट्रंप के दावे के अनुसार ईरान ने जमीन में दबे न्यूक्लियर डस्ट को लौटाने के लिए सहमति जताई है, जो पिछले साल अमेरिकी हमलों के बाद जमीन के नीचे दब गया था। लेकिन अभी सवाल यह उठ रहा है कि क्या सच में ईरान ने अमेरिका की इस मांग को स्वीकृति दे दी है क्योंकि यह युद्ध शुरू होने के पीछे एक बहुत बड़ा फैक्टर था। हालांकि इस दावे पर ईरान की कोई प्रतिक्रिया अभी सामने आई नहीं हैं।

यूरेनियम क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

परमाणु प्लांट में बिजली बनाने और परमाणु हथियार तैयार करने के लिए एनरिच्ड यूरेनियम इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि अमेरिका इस पर लगातार नजर बनाए हुए है और बातचीत में इसे सबसे जरूरी मुद्दा माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का मानना है कि ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम जमीन के बहुत गहराई में दबा हुआ है। ऐसा पिछले साल अमेरिका द्वारा ईरान के तीन बड़े परमाणु ठिकानों पर हमले के कारण हुआ था।

अभी तक नहीं हुई कोई डील

हाल ही में दोनों देशों के बीच 21 घंटे लंबी शांति वार्ता हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस निष्कर्ष पर खत्म नहीं हुई। दोनों देश अभी भी आपस में बात कर रहे हैं और जल्द ही फिर से आमने-सामने बातचीत हो सकती है। अमेरिका का कहना है कि ईरान पहले से थोड़ा नरम रुख दिखा रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक डील नहीं हुई है।

न्यूक्लियर मुद्दे पर खींचतान

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना अमेरिका का मेन एजंडा बना हुआ है। 2015 में हुए एक समझौते के तहत ईरान ने माना था कि वह यूरेनियम को एक सीमित स्तर तक ही शुद्ध करेगा, लेकिन बाद में अमेरिका इस समझौते से अलग हो गया, जिसके बाद हालात बदल गए। फिर ईरान ने अपना परमाणु काम बढ़ाया और यूरेनियम को ज्यादा स्तर तक शुद्ध करना शुरू कर दिया। हालांकि, ईरान हमेशा कहता है कि उसका मकसद सिर्फ बिजली बनाना है, न कि परमाणु हथियार तैयार करना। अगर ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम सौंप देता है, तो इसे बड़ा और ठोस कदम माना जाएगा, लेकिन अगर बातचीत फेल हुई, तो अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई एक विकल्प होगा जो बहुत मुश्किल और खतरनाक होगा।