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170 छात्राओं की मौत से कांपा ईरान: 1300 स्कूल मलबे में तब्दील, खौफ के साये में कैसे पढ़ रहे मासूम ?

US-Iran Ceasefire : अमेरिका ने ईरान के साथ सीजफायर बढ़ाया है लेकिन बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी है। वहीं, ईरान ने इसे युद्ध का ऐलान बताते हुए पलटवार किया है।

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Apr 22, 2026
ईरान में तबाही के बाद का नजारा । ( फोटो: ANI)

Ceasefire : दुनिया की नजरें एक बार फिर खाड़ी देशों के बढ़ते तनाव पर टिक गई हैं। एक तरफ जहां सीजफायर की खबरों ने थोड़ी राहत दी है, वहीं समंदर में जारी नाकाबंदी ने एक नए संघर्ष की आहट दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सीजफायर बढ़ाने का ऐलान तो किया है, लेकिन साथ ही ईरानी बंदरगाहों की कड़ी समुद्री नाकाबंदी भी जारी रखी है। अमेरिका का साफ तौर पर कहना है कि जब तक तेहरान बातचीत के लिए कोई ठोस प्रस्ताव नहीं देता और किसी नतीजे पर नहीं पहुंचता, तब तक यह नाकाबंदी नहीं हटेगी।

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बंदरगाहों की नाकाबंदी सीधे तौर पर 'युद्ध की कार्रवाई': ईरान

इस अमेरिकी कदम से ईरान में भारी आक्रोश है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनके बंदरगाहों की नाकाबंदी सीधे तौर पर 'युद्ध की कार्रवाई' है। उन्होंने इसे सीजफायर का खुला उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है कि ईरान को पता है कि इस तरह की दादागिरी और दबाव का सामना कैसे करना है। कूटनीतिक हलकों में इसे शांति वार्ता से पहले दबाव बनाने की कूटनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

युद्ध की आग में झुलसा शिक्षा का ढांचा

इस भू-राजनीतिक खींचतान के बीच सबसे बड़ी कीमत ईरान के आम नागरिकों और मासूम बच्चों को चुकानी पड़ी है। अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान का शिक्षा ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है। ईरान के शिक्षा मंत्री अलिरेजा काजेमी के अनुसार, युद्ध के दौरान देशभर में करीब 1,300 स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इनमें से 775 स्कूलों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। तेहरान, करमानशाह, इस्फ़हान और होर्मोज़गान प्रांतों में सबसे ज्यादा तबाही मची है। करीब 20 स्कूल तो पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं, जिन्हें अक्टूबर तक दोबारा खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है।

खौफ के साये में भी नहीं रुकी पढ़ाई

इतनी भारी तबाही के बावजूद ईरान ने शिक्षा को रुकने नहीं दिया है। टीवी, ऑनलाइन क्लास और रिमोट लर्निंग के जरिए बच्चों की पढ़ाई लगातार जारी है। युद्ध की विभीषिका ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर जो गहरा असर डाला है, उसके लिए उन्हें विशेष काउंसलिंग दी जा रही है।

खौफनाक हमले में 170 लोगों की जान चली गई

इस युद्ध का सबसे दर्दनाक और स्याह पहलू मीनाब के शजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुआ मिसाइल हमला रहा। इस खौफनाक हमले में 170 लोगों की जान चली गई, जिनमें से ज्यादातर मासूम स्कूली छात्राएं और उनकी शिक्षिकाएं थीं। इन बच्चों की याद में अब देश भर के स्कूलों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जो युद्ध के खौफनाक चेहरे को बयां करती हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का सरासर उल्लंघन बताया

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की 'दबाव और बातचीत' की दोहरी नीति इस क्षेत्र में अस्थिरता को और भड़का सकती है। वहीं, वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने स्कूलों पर हुए हमलों और मासूम छात्राओं की मौत पर गहरी चिंता जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का सरासर उल्लंघन बताया है। आम जनता में इस नाकेबंदी से आर्थिक तंगी और महंगाई बढ़ने का खौफ साफ देखा जा सकता है।

ईरान तबाह हुए स्कूलों को पूरी तरह से फिर से संचालित कर पाता है या नहीं ?

अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ईरान अमेरिका के भारी दबाव में आकर बातचीत की मेज पर आएगा या फिर बंदरगाहों की नाकाबंदी के जवाब में खाड़ी में कोई सैन्य कदम उठाएगा। इसके अलावा, यह भी देखना अहम होगा कि नए शिक्षा सत्र (अक्टूबर) तक ईरान अपने तबाह हुए स्कूलों को पूरी तरह से फिर से संचालित कर पाता है या नहीं।

आम लोगों तक दवाओं और खाने-पीने की चीजों की पहुंच मुश्किल हो जाएगी

इस पूरे सैन्य और राजनीतिक विवाद का एक बड़ा पहलू विशुद्ध रूप से आर्थिक और मानवीय है। बंदरगाहों की नाकाबंदी से न सिर्फ ईरान का तेल और व्यापारिक निर्यात ठप होगा, बल्कि आम लोगों तक जरूरी दवाओं और खाने-पीने की चीजों की पहुंच भी मुश्किल हो जाएगी। वहीं, तबाह हुए स्कूलों की मरम्मत के बीच बच्चों का मनोवैज्ञानिक सदमा एक ऐसी अदृश्य चोट है, जिससे उबरने में ईरान की एक पूरी पीढ़ी को कई साल लग जाएंगे।

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