
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अचानक शांति की उम्मीद नजर आई है है। प्रमुख मीडिया संस्थान 'अल अरबिया' ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसकी घोषणा कुछ घंटों में हो सकती है। अगर यह डील फाइनल हुई तो लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष थम सकता है और पूरा विश्व राहत की सांस लेगा।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में सबसे पहले जमीन, समुद्र और हवा में तुरंत पूर्ण युद्धविराम का ऐलान है। दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य, नागरिक या आर्थिक ठिकानों पर हमला नहीं करेंगे। मीडिया युद्ध भी बंद होगा।
इसके अलावा, समझौते में दोनों पक्षों ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने का वादा किया है। अरब सागर, हॉर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में जहाजों की आजादी बनी रहेगी।
साथ ही एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी जो समझौते पर नजर रखेगी और किसी विवाद को सुलझाएगी। समझौता लागू होते ही सात दिन के अंदर बाकी मुद्दों पर बातचीत शुरू हो जाएगी।
खबर यह भी है कि अमेरिका धीरे-धीरे अपनी पाबंदियां हटाएगा, लेकिन इसके बदले ईरान को सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। समझौता घोषणा के तुरंत बाद लागू माना जाएगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्वीडन में नाटो सम्मेलन में कहा- ईरान के साथ डील में कुछ प्रगति हुई है। यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान में अपना कार्यक्रम बढ़ाकर ईरानी विदेश मंत्री से दूसरी बैठक कर चुके हैं। सूत्र बता रहे हैं कि पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी जल्द ईरान जा सकते हैं, जब दोनों देश औपचारिक घोषणा करने को तैयार होंगे।
हालांकि, समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर बहुत सख्त हैं।
उन्होंने पहले कहा था- हम इसे हासिल कर लेंगे। हम इसे नहीं चाहते और न ही इस्तेमाल करेंगे। शायद इसे नष्ट कर देंगे, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।
बता दें कि ईरान के पास करीब 900 पाउंड उच्च समृद्ध यूरेनियम है, जिसे और परिष्कृत करके हथियार बनाने लायक बनाया जा सकता है। अमेरिका और इजराइल इसे अपने लिए बड़ा खतरा मानते हैं। इजराइल लंबे समय से इस कार्यक्रम का विरोध कर रहा है।