Diplomacy: डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच नई डील की शर्तें लगभग तय हो चुकी हैं। जल्द ही दोनों देशों के बीच आधिकारिक बातचीत शुरू हो सकती है, जिससे खाड़ी देशों की राजनीति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
Negotiations: अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चली आ रही कड़वाहट अब शायद एक नए मोड़ पर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही तेज कूटनीति के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान देकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक नए समझौते को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। ट्रंप के इस दावे के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच 'बहुत जल्द' सीधी बातचीत शुरू हो सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) भारी तनाव के दौर से गुजर रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि डील का एक बड़ा हिस्सा पहले ही तय किया जा चुका है। इसका मतलब है कि पर्दे के पीछे दोनों देशों के कूटनीतिज्ञ लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे और बुनियादी शर्तों पर सहमति बन चुकी है। यह खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि खुद ट्रंप के कार्यकाल में ही अमेरिका ने 2018 में ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था।
अगर अमेरिका और ईरान किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं, तो यह वैश्विक राजनीति के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी, बल्कि ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में भी ढील मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि इस डील का ग्लोबल ऑयल मार्केट कच्चे तेल के बाजार पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है।
हालांकि अभी तक समझौते की बारीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसके तहत ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को सीमित करेगा। इसके बदले में अमेरिका, ईरान पर लगे कड़े व्यापारिक और बैंकिंग प्रतिबंधों को हटा सकता है। दुनिया भर के विशेषज्ञ अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आधिकारिक तौर पर इस बातचीत की तारीख का ऐलान कब होता है।
इस खबर पर यूरोपीय देशों ने राहत की सांस ली है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यह कदम मिडिल ईस्ट में युद्ध के खतरे को टालने के लिए एक बेहद सकारात्मक पहल है। अब नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि ईरान का विदेश मंत्रालय इस दावे पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देशों के प्रतिनिधि किसी तटस्थ देश (जैसे ओमान या कतर) में मुलाकात करेंगे।
बहरहाल, इस डील का सबसे बड़ा पहलू इजरायल है। इजरायल हमेशा से ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का कड़ा विरोधी रहा है। ऐसे में अमेरिका-ईरान की इस नजदीकी पर इजरायल का अगला कदम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।