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अपने ही जाल में बुरी तरह फंस गया अमेरिका, ईरान युद्ध ने खोल दिया बड़ा राज, अब कैसे डैमेज कंट्रोल करेंगे ट्रंप?

West Asia Conflict 2026: अमेरिका-ईरान युद्ध ने अमेरिकी की पश्चिम एशिया सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया। इस युद्ध ने अमेरिकी सुरक्षा की पोल खोल दी है।
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May 15, 2026
Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- ANI)

ईरान के साथ युद्ध शुरू करना अमेरिका को भारी पड़ गया है। मिडिल ईस्ट में उसकी सुरक्षी की पोल खुल गई है। फिलहाल, जो स्थिति है, उसे देखकर केवल यह कह सकते हैं कि अमेरिका अपने ही जाल में बुरी तरह फंस गया है।

दरअसल, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चला युद्ध अब पूरे इलाके की सुरक्षा को हिला रहा है। खाड़ी देशों ने सालों से अमेरिका पर भरोसा किया, अपने यहां अमेरिकी बेस बनाए और अरबों डॉलर के हथियार खरीदे। लेकिन जब ईरान ने इन बेस पर हमले किए तो अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम की कमजोरी साफ नजर आई। जो सुरक्षा उम्मीद की गई थी, वो नहीं मिली।

अमेरिका खुद फंस गया जाल में

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने लिखा है कि अमेरिका ने ईरान पर युद्ध छेड़कर खुद को फंसा लिया। सैन्य के हिसाब से तो ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया गया, उसके कई बड़े नेता मारे गए, लेकिन ईरान की हिम्मत नहीं टूटी। वो अमेरिका की शर्तें मानने को तैयार नहीं।

सिर्फ हवाई हमलों और धमकियों से इस युद्ध को जीतना आसान नहीं रहा। सिब्बल ने कहा कि अमेरिका ईरान में जमीन पर सैनिक भेजने से बच रहा है क्योंकि इसमें अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू राजनीति में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अवैध युद्ध और यूएन का बना मजाक

यह युद्ध साफ तौर पर यूएन चार्टर का उल्लंघन है। हालांकि ईरान की कुछ नीतियों पर अमेरिका और इजराइल के गिले-शिकवे सही हो सकते हैं, लेकिन इतिहास में दोनों तरफ गलतियां हुई हैं। सिब्बल लिखते हैं कि इस युद्ध के बड़े परिणाम होंगे, जिन्हें अमेरिका ने शायद पहले नहीं सोचा।

उन्होंने कहा- ट्रंप इस पूरे मामले को सोशल मीडिया का तमाशा बना रहे हैं। उनके पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयान अजीब, विरोधाभासी और धमकी भरे आ रहे हैं। एक तरफ यूएन को कमतर आंकते हैं, बजट रोकते हैं, दूसरी तरफ उसी यूएन से मदद मांगते हैं।

हॉर्मुज पर ईरान का दबदबा

ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट बंद करके दुनिया के तेल परिवहन को प्रभावित कर रहा है। ट्रंप पहले कहते हैं कि अमेरिका को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, प्रभावित देश खुद देख लें। फिर नाटो से मदद मांगते हैं, बाद में कहते हैं कि जरूरत नहीं।

एक वक्त पर स्ट्रेट पर अमेरिकी ब्लॉकेड की बात करते हैं, नौसेना भेजते हैं, लेकिन ईरानी विरोध के आगे पीछे हट जाते हैं। आखिर में यूएन से अपील करते हैं कि ईरान को मनाए।

खाड़ी देशों में उठे सवाल

खाड़ी देश अब सोच रहे हैं कि अमेरिका पर भरोसा कितना सही है। महंगे हथियार खरीदने के बावजूद सुरक्षा नहीं मिल रही तो भविष्य क्या होगा? इस युद्ध ने पूरे इलाके में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

सिब्बल का कहना है कि अमेरिका की रणनीति अभी तक कामयाब नहीं हुई। ईरान टूटा नहीं, बल्कि और मजबूती से लड़ रहा है। अब देखना यह है कि ट्रंप इस जाल से कैसे निकलते हैं और इलाके में शांति कब लौटती है।

Updated on:
15 May 2026 10:06 pm
Published on:
15 May 2026 10:06 pm