
अमरोहा के 4 गांवों में सैकड़ों बीघा फसल डूबी | Image - X/@IANS
Amroha Ganga Flood:अमरोहा जिले में पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर साफ नजर आने लगा है। तिगरी क्षेत्र में गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों और खेतों में चिंता का माहौल बन गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तिगरी गंगा में मंगलवार को जलस्तर 200.70 सेमी दर्ज किया गया, जबकि सोमवार को यह 200.65 सेमी था। यानी 24 घंटे के भीतर जलस्तर में करीब 5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। भले ही वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे बताया जा रहा हो, लेकिन लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण नदी किनारे रहने वाले लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
गंगा का पानी बढ़ने का सीधा असर तिगरी गंगा घाट पर भी दिखाई दे रहा है। घाट के आसपास पानी पहुंचने के कारण यहां रहने वाले पुरोहितों की झोपड़ियां जलमग्न हो गई हैं। पानी बढ़ने से घाट क्षेत्र में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और लोगों को कई जगह पानी के बीच से होकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
तिगरी घाट पर पानी भरने के कारण लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों में भी परेशानी बढ़ गई है। घाट के आसपास मौजूद रास्तों और स्थानों पर पानी पहुंचने से आवाजाही पहले की तुलना में मुश्किल हो गई है। गंगा के जलस्तर में लगातार बदलाव के चलते ग्रामीण और घाट से जुड़े लोग स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे गंभीर असर नदी किनारे स्थित कृषि क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। गांव ओसीताजगदेपुर में कई खेतों में करीब चार-चार फीट तक पानी भर गया है। खेतों में पानी जमा होने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं और लंबे समय तक जलभराव रहने पर नुकसान और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ओसीताजगदेपुर समेत आसपास के चार गांवों में गंगा के बढ़ते पानी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इन गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब चुकी है। खेतों में खड़ी फसल लंबे समय तक पानी में रहने से उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
गंगा का पानी खेतों में पहुंचने के बाद किसानों के सामने अपनी फसल बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जिन खेतों में अभी कुछ फसल बची हुई है, किसान उसे जल्द से जल्द सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। पानी से भरे खेतों में उतरकर फसल काटना भी उनके लिए आसान नहीं है, लेकिन नुकसान कम करने के लिए किसान जोखिम उठाने को मजबूर हैं।
जलभराव के बावजूद कई किसान खेतों में पहुंचकर बची हुई फसल काट रहे हैं। ग्रामीणों को पानी के बीच से होकर खेतों तक जाना पड़ रहा है और वहां से फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में रहा तो बची हुई फसल को भी नुकसान हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश को बताया जा रहा है। बारिश के कारण हरिद्वार बैराज से गंगा नदी में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। अतिरिक्त पानी का असर गंगा के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है और इसी वजह से अमरोहा के तिगरी क्षेत्र में जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
गंगा का पानी बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीण भी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। खेतों में पानी भरने के साथ रास्तों पर भी जलभराव की स्थिति बन रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में उनकी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
बाढ़ जैसे हालात के बीच ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है। खेतों और आसपास के रास्तों में पानी भरने से चारा लाने-ले जाने में परेशानी हो रही है। जिन इलाकों में पानी ज्यादा जमा है, वहां ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
अमरोहा के तिगरी क्षेत्र में गंगा का बढ़ता पानी किसानों और ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। हालांकि प्रशासन के अनुसार गंगा अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में जारी बारिश और हरिद्वार बैराज से छोड़े जा रहे पानी के कारण जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में तिगरी और आसपास के गांवों में ग्रामीणों की नजर अब गंगा के अगले जलस्तर पर टिकी हुई है।
Updated on:
08 Sept 2026 03:56 pm
Published on:
08 Sept 2026 03:56 pm
