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सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर गरमाई राजनीति: सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क भड़के, बोले- बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक

Ziaur Rahman Barq: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद गिराए जाने पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए धार्मिक स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठाए हैं।
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सम्भल

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Mohd Danish

Sep 07, 2026

saharanpur mosque demolition ziaur rahman barq sambhal

सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर भड़के सपा सांसद | Image - X/@ziaurrahmanbarq

Saharanpur Mosque Demolition:सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को बुलडोजर से गिराए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने रविवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट करते हुए मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को बेहद गलत, आपत्तिजनक, शर्मनाक और निंदनीय बताया। सांसद ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को राजनीतिक स्वार्थ या किसी अन्य उद्देश्य के लिए निशाना बनाया जाना उचित नहीं है।

पुरानी मस्जिद का दावा

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने अपने बयान में दावा किया कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद यह मस्जिद वर्ष 1911 से भी पहले से बनी हुई थी। उन्होंने मस्जिद के इतने पुराने होने का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी जगह को पुलिस और प्रशासन की ओर से बुलडोजर से गिराया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। बर्क के मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई न्याय व्यवस्था और कानून के पालन को लेकर भी चिंता पैदा करती है।

संविधान पर सवाल

बर्क ने कहा कि धार्मिक स्थलों को लेकर होने वाली कार्रवाई को संविधान में दिए गए अधिकारों और देश की धर्मनिरपेक्ष भावना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती है। सांसद ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सभी धर्मों और समुदायों की आस्था का सम्मान किया जाना जरूरी है।

शिकायतों के बाद कार्रवाई का आरोप

सपा सांसद ने अपने बयान में एक कथित चलन को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आजकल एक ऐसा माहौल बनता जा रहा है, जिसमें एक गिरोह साजिश के तहत किसी धार्मिक स्थल के खिलाफ शिकायत करता है और इसके बाद उस स्थल को गिराने की कार्रवाई की जाती है। बर्क ने कहा कि अगर धार्मिक स्थलों को इस तरह निशाना बनाया गया तो इससे समाज में तनाव और अविश्वास बढ़ सकता है।

धार्मिक आजादी का अधिकार

जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उनके अनुसार, देश के नागरिकों को अपनी आस्था के अनुसार धार्मिक गतिविधियां करने और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस अधिकार को छीनने का अधिकार किसी को नहीं है और संविधान में मिले अधिकारों की रक्षा करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

सभी धर्मों का बराबर सम्मान

सपा सांसद ने अपने बयान में भारत की विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य सभी समुदाय भारत के बराबर नागरिक हैं। बर्क ने जोर देकर कहा कि देश की मजबूती आपसी सम्मान, भाईचारे और सभी धर्मों की आस्था के सम्मान से होती है, न कि धार्मिक विवादों को बढ़ावा देने से।

नफरत नहीं विकास जरूरी

बर्क ने कहा कि देश को नफरत और धार्मिक विवादों की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, सरकारों को ऐसे मुद्दों के बजाय आम जनता से जुड़े बुनियादी सवालों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और देश के विकास जैसे मुद्दे जनता के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और सरकारों को इन्हीं क्षेत्रों में ठोस काम करने की जरूरत है।

सरकार से अपील

सपा सांसद ने सरकारों से अपील की कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को राजनीतिक स्वार्थ या अन्य उद्देश्य से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। बर्क के मुताबिक, कानून का पालन करते हुए सभी समुदायों की धार्मिक आस्था और अधिकारों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है।

कानून और संविधान की बहस

बर्क ने अपने बयान के जरिए धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि मजबूत भारत की पहचान संविधान की सुरक्षा, कानून का पालन और प्रत्येक धर्म की आस्था का सम्मान करने से होती है। अब इस मामले में प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।