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Shabnam Case : शबनम को फांसी से बचाने के लिए खटखटाया मानवाधिकार का दरवाजा, याचिका खारिज

Shabnam Case : प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली शबनम की दया याचिका को मानवाधिकार आयोग ने किया खारिज

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Shabnam Case

अमरोहा. Shabnam Case : अमरोहा में प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली शबनम (Shabnam) को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। बता दें कि शबनम को फांसी के तख्ते पर लटकने बचाने के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) में दया याचिका लगाई थी। मानवाधिकार आयोग ने याचिका दर्ज होते ही 24 घंटे बाद ही उसे खारिज कर दिया है। अब देखने वाली बात ये होगी कि फांसी पर लटकने से बचने के लिए बावनखेड़ी हत्याकांड (Bawankhedi Massacre) की दोषी शबनम कौन सा कानूनी दांव-पेच अपनाती है।

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ये है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में 14 व 15 अप्रैल 2008 की रात शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने माता-पिता, भाई-भाभी समेत 7 लोगों को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद शबनम में खुद को बचाने के लिए पुलिस के सामने झूठी कहानी गढ़ दी थी। हत्याकांड के सुर्खियों में आने के बाद पुलिस ने गंभीरता से जांच की और महज चार दिन में वारदात का खुलासा कर दिया। इसके बाद अमरोहा जिला न्यायालय ने शबनम और उसके प्रेमी सलीम को दोषी करार देते हुए 2010 में फांसी की सजा सुनाई थी। जब केस हाईकोर्ट और सुप्रीम तक पहुंचा तो दोनों की सजा बरकरार रखी गई। बता दें कि इस मामले में 2016 में राष्ट्रपति ने शबनम की दया याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि अभी तक डेथ वारंट जारी नहीं हुए हैं।

मासूम का दर्द देख पिघला दानिश खान का दिल

यहां बता दें कि मानवाधिकार आयोग में याचिका दाखिल करने वाले दानिश खान सामाजिक कार्यकर्ता के साथ आरटीआई एक्टीविस्ट भी हैं। पहले दानिश खान ने ही शबनम को जल्द फांसी देने की मांग की थी। इसके बाद शबनम को फांसी पर लटकाए जाने की सरगर्मियां तेज हो गईं। वहीं, मीडिया का फोकस भी रामपुर जेल पर था, लेकिन कानूनी दांव-पेच के कारण शबनम की फांसी की तारीख टल गई। रामपुर जेल में बंद होने के दौरान शबनम से उसका मासूम बेटा मिलने आया था, जिसके बाद मासूम ने राष्ट्रपति से मां की फांसी रोकने की गुहार लगाई थी। बच्चे की व्यथा सुन दानिश खान का मन भी बदल गया। इसी वजह से दानिश खान शबनम की फांसी की सजा को बदलवाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचे।

अब यूएनओ जा सकते हैं दानिश खान

दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता दानिश खान ने 21 फरवरी को मानवाधिकार आयोग में रिट फाइल की थी। 20 मई को दानिश खान की रिट दर्ज की गई, लेकिन इसके अगले ही दिन मानवाधिकार आयोग ने रिट को खारिज कर दिया। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि यह प्रकरण उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। क्योंकि मामला न्यायालय से जुड़ा है। अब बताया जा रहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता दानिश खान शबनम को फांसी के तख्ते पर लटकने से बचाने के लिए यूएनओ जाने का मन बना रहे हैं।

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