
अरे वाह: हवा हो गए आदेश; बिना एनओसी पुष्पराजगढ़ के बायोस्फेयर एरिया में हो खनिज उत्खन्न, ९७ गांव उत्खन्न वर्जित क्षेत्र है घोषित
बेधडक़ संचालित हो रहे अवैध सैकड़ो क्रेशर, वाहनों से ढुल रही अवैध खजिन सम्पदा
अनूपपुर। पर्यावरण की सुरक्षा दृष्टि से जिले की पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत के ९७ गांवों ने खनिज उत्खन्न प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। वहीं पर्यावरण संस्था (दिया और सिया) के दिशा-निर्देशों में जल्द ही लीज की संचालित खदानों को भी समय सीमा समाप्ति उपरांत बंद करने की प्रक्रिया में जुटी है। बावजूद पुष्पराजगढ़ के बायोस्फेयर एरिया सहित प्रशासन द्वारा चिह्नित किए गए ९७ गांवों से खनिज सम्पदाओं का अवैध परिवहन जारी है। यहीं नहीं बिना अनुमति और पर्यावरण मानकों के जगह जगह क्रेशर संचालित हो रही है, जहां अवैध तरीके से तोड़ी गई चट्टानों के पत्थरो को दिन-रात परिवहन कर खपाया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं है, लेकिन पुष्पराजगढ़ विकासखंड की अधिकांश गांवों की शासकीय या निजी जमीन अवैध पत्थर उत्खनन और मुरूम उत्खनन में गड्ढों में तब्दील हो गई है। जिला प्रशासन के अनुसार नर्मदा संरक्षण के लिहाज से ये ९७ गांव अमरकंटक के तटीय इलाकों सहित आसपास से जुड़ी गांव हैं जो अमरकंटक से प्रवाहित होती नर्मदा के डिंडौरी जिले की सीमावर्ती क्षेत्र से जोड़ती है तथा उसके प्रतिबंध से नर्मदा की जलधारा को संरक्षित किया जा सकेगा।
बताया जाता है कि १५ मई २०१७ को अमरकंटक में आयोजित नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा के पूर्णता समापन समागम के दौरान स्वंय प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा के छलनी होने तथा जलविरलता की बात स्वीकारी थी। जिसपर उन्होंने जिला प्रशासन व वनविभाग से नर्मदा के उद्गम स्थल से प्रवाहित होने वाली नर्मदा के संरक्षण, अधिक से अधिक वृक्षों के रोपण तथा खनिज उत्खन्न को बंद कराने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद जिला प्रशासन ने जिला स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण(दिया) के तहत पुष्पराजगढ़ के ९७ गांवों को चयनित करते हुए वहां खनिज उत्खन्न बंद कराने का निर्णय लिया था। जिला स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण(दिया) के प्रावधानों के तहत जिला प्रशासन ने पुष्पराजगढ़ के उन ९७ गांवों में जहां ५ हेक्टेयर से कम भूभाग पर आवंटित होने वाले खदानों को खनिज विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाता था पर अंकुश लगा दिया। वहीं क्षेत्र में संचालित लीज वाली खदानों को बंद करने के प्रस्ताव शासन को भेजी गई थी।
बॉक्स: इन गांवों से खनिज उत्खनन है प्रतिबंधित
जिला प्रशासन द्वारा चयनित किए गए ९७ गांवों में गिरारीकलां, बेंदी, थामरडार, ताला, बम्हनी, डोरी, गुट्टीपारा, बिजौड़ी, सरवाही, संचारा, केशवानी, दमेहड़ी, कोयलारी, धुईदादर, सिवनी संगम, परसवार, पुरगा, नेवसा, कस्तुरी, बिलासपुर, पालाडोंगरी, महोरा, खजुरवार, बधनीभवंर, भीमकुंडी, सरईटोला, करौंदाटोला, दुआरी, खांटी, पड्रिया, खुर्सी, केकडिया, बोदा, गढ़ीदादर, चचानडीह, नादपुर, बसनिंहा, जिलन,छपानी, अचलपुर, जुहिला, करौंदी, धरहरखुर्द, धरहरकलां, पड्डी, पथैटी, पिपराहा, सलहरो, उमनिया, नानघटी, बेलगांव, सोनहरा, बरबसपुर, धोबे, बसही, अमगंवा, लेढरा, लपटी, मेढराखार, मेखलपहद, जामकछार, बकटी, दोनिया, ताली, सेंदूरखार, ब्राह्नी, बहपुर, बहपुरी, भेजरी, पोंडी, मिडिया, जुगुवाकापा, हर्री, मोंहदी, बरसोत, हर्राटोला, पोंडकी, लालपुर, पमरा, लखौरा, किरगी, बधहर्रा, लोहानीटोला, धर्मदास, गिरवी, रेहीदादर, मेखलपहाड़, बिजौड़ी, दमगढ़, भुंडाकोना, परर्रीसेमर, भमरिया, उमरगोंह, जालेश्वर, अमरकंटक में उत्खनन को प्रतिबंधित किया गया है।
बॉक्स: बिना एनओसी कैसे संचालित क्रेशर
पुष्पराजगढ़ में बिना अनुमति के सैकड़ो क्रेशर संचालित है। जिन्हें खनिज विभाग या फिर प्रशासन द्वारा कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई है। इनमें पुष्पराजगढ़ सुदूर ग्रामीण अचंलों तथा पटना-सरई गांव की मुख्य ५० किलोमीटर के दायरे में संचालित दर्जनों अवैध क्रेशर मिल जाएंगे। वहीं दमहेड़ी, बेनीबारी, करपा वाले ग्रामीण अंचलों में भी अवैध क्रेशरों की कतार लगी है।
वर्सन:
तत्कालीन कलेक्टर ने किन किन गांवों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया था उनकी सूची निकालने के साथ क्षेत्र में संचालित क्रेशरों में वैध और अवैध क्रेशरों की छंटनी कर आगे की कार्रवाई करवाती हूं।
अनुग्रह पी, कलेक्टर अनूपपुर।
Published on:
10 Jul 2018 08:51 pm
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