
अशोकनगर. सरकार भले ही खेती को लाभ का धंधा बनाने का दावा कर रही हो। लेकिन हकीकत में जहां किसान खाद के लिए तो परेशान हैं ही, वहीं डीजल की बढ़ती रेटों ने भी किसानों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि पिछले 16 महीने में डीजल 29.56 रुपए लीटर मंहगा हो गया है। नतीजतन इस बार रबी सीजन की फसलों की बोवनी के लिए किसानों को 20.35 करोड़ रुपए डीजल पर ज्यादा खर्च करना पडेंगे।
जिले में 23 जून को डीजल की रेट 78 .01 रुपए लीटर थी, लेकिन 30 अक्टूबर को डीजल की रेट बढ़कर 107.57 रुपए हो गई है। यानी पिछले 16 माह में जिले में डीजल की रेट में 29.56 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि इस बार उड़द-सोयाबीन की जिले में ज्यादातर रकबे की फसलें बाढ़ व अतिवृष्टि से बर्बाद हो गईं और ज्यादातर किसानों ने तो नुकसान से अफलन के चलते सोयाबीन को खुद ही नष्ट कर दिया। जिले में 3.06 लाख हेक्टेयर जमीन पर इस बार रबी सीजन की फसलों की बोवनी होना है और इस बोवनी पर जिले में 6 8 .8 5 लाख लीटर डीजल खर्च होगा। लेकिन 29.56 रुपए लीटर मंहगा होने से इस बार किसानों को बोवनी पर 20 लाख 35 हजार 20 हजार 6 00 रुपए ज्यादा खर्च होंगे।
ऐसे समझें.. खेती में डीजल खर्च का गणित
एक हेक्टेयर जमीन पर पंजा या सीडड्रिल चलाने पर साढ़े सात लीटर डीजल खर्च होता है। जिले में 3.06 लाख हेक्टेयर जमीन पर इस बार रबी सीजन की फसलों की बोवनी होगी, यानी एक बार में 22.95 लाख लीटर डीजल खर्च होगा। जबकि बोवनी के लिए खेत तैयार करने ट्रेक्टर से दो बार पंजा चलाना अनिवार्य है और इसके बाद एक बार ट्रेक्टर से सीडड्रिल चलाकर बोवनी की जाती है। यानी प्रत्येक किसान को तीन बार डीजल खरीदना पड़ेगा और तीन बार में जिले में 6 8 .8 5 लाख लीटर डीजल खर्च होगा। जो 107.57 रुपए प्रति लीटर की रेट पर 74 करोड़ छह लाख 19 हजार 450 रुपए में आता है, जबकि २३ जून 2020 में 78 .01 रुपए लीटर रेट में इतना डीजल 53 करोड़ 70 लाख 98 हजार 850 रुपए में आता।
सवाल: फिर खेती कैसे बनेगी लाभ का धंधा
किसान अबरार खां, मनोज श्रीवास्तव और गुलाबसिंह का कहना है कि जहां पिछले साल लॉकडाउन में मंडियां न खुलने से किसानों को अनाज बेचने भटकना पड़ा और जरूरत के समय औने-पौने दामों में अनाज बेचना पड़ा। इस बार उड़द-सोयाबीन की फसलें बर्बाद हो गईं और कई दिन तक खाद के लिए लाइनों में लगना पड़ा। खाद-बीज भी मंहगे हो गए, साथ ही कई किसानों को तो कमी के चलते मंहगी रेट पर खाद खरीदना पड़ा। वहीं अब डीजल की कीमतें रोजाना बढ़ रही हैं। इससे यह समझ नहीं आता कि खेती कैसे लाभ का धंधा बनेगी। साथ ही किसानों का कहना है कि पिछले साल सरकार द्वारा दिए गए आर्थिक पैकेज का किसानों को कोई लाभ ही नजर नहीं आया।
Published on:
31 Oct 2021 02:12 pm
बड़ी खबरें
View Allअशोकनगर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
