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Afghanistan: राजधानी काबुल IED विस्फोट, 2 अफगान मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौत

HIGHLIGHTS अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक IED विस्फोट में अफगानिस्तान स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग ( AIHRC ) के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ( United Nations Support Mission ) ने इस हमले की निंदा की है। UNAMA ने ट्वीट करते हुए कहा है कि अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए घटना की तत्काल जांच होने की जरूरत है।

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Kabul Blast

Afghanistan: IED blast in Capital Kabul, 2 Afghan human rights activists killed

काबुल। अफगानिस्तान में शांति ( Afghanistan peace ) बहाली को लेकर अमरीका ( America ) और तालिबान ( Taliban ) के बीच एक अहम समझौता हुआ था, लेकिन इसके बावजूद भी हमलों का सिलसिला बरकरार है। अफगानिस्तान में आतंकियों ने शनिवार को एक बम विस्फोट ( IED Blast ) किया, जिसमें अफगानिस्तान स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग ( AIHRC ) के दो कर्मचारियों की मौत हो गई।

पुलिस ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया है कि यह विस्फोट सुबह करीब 7.45 बजे राजधानी काबुल के बोटखाक में हुआ, जब AIHRC के दोनों कर्मचारी ऑफिस जा रहे थे। धमाके में दोनों की मौत हो गई। फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है।

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काबुल के पुलिस प्रवक्ता फिरदौस फरमाज ने बताया कि मैग्नेटिक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस ( IED ) से विस्फोट हुआ है। AIHRC के प्रवक्ता मुहम्मद रजा जाफरी ने बताया कि इस हादसे में मरने वालों में एक महिला शामिल थीं। जाफरी ने मृतक महिला अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया।

UN ने हमले की निंदा की

आपको बता दें कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ( United Nations Support Mission ) ने इस हमले की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर इस तरह का हमला होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। UNAMA ने ट्वीट करते हुए कहा है कि अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए घटना की तत्काल जांच होने की जरूरत है।

2019 में 3,400 से अधिक की हुई हत्या

आपको बता दें कि अफगानिस्तान में लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं। देश में संयुक्त राष्ट्र मिशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में खूनी संघर्ष की घटनाओं में 3,400 से अधिक नागरिकों के मारे जाने और 6,900 से अधिक अन्य घायल होने के साथ अफगान नागरिक सशस्त्र संघर्षों का खामियाजा अभी भी भुगत रहे हैं।

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अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने तालिबान और अन्य विद्रोही समूहों को 62 प्रतिशत नागरिकों के हताहत होने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस अवधि में सुरक्षा बलों के 28 प्रतिशत जवान हताहत हुए, जबकि बाकी 10 प्रतिशत लोगों की मौत अन्य कारणों से हुई।